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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:20 · नई दिल्ली संस्करण

कच्छ की खाड़ी में डॉल्फिन की सबसे अधिक मौजूदगी, वन विभाग के सर्वेक्षण में हुआ बड़ा खुलासा

राष्ट्रीय सागर डेस्क4 मिनट का पठन
कच्छ की खाड़ी में डॉल्फिन की सबसे अधिक मौजूदगी, वन विभाग के सर्वेक्षण में हुआ बड़ा खुलासा

गांधीनगर। गुजरात के दक्षिण कच्छ की खाड़ी में डॉल्फिन सबसे अधिक देखे जाने वाले समुद्री स्तनधारी जीव के रूप में उभरी हैं। गुजरात वन विभाग के अधीन स्वायत्त संस्था गुजरात इकोलॉजिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (गीर) फाउंडेशन द्वारा अक्टूबर 2023 से फरवरी 2025 के बीच किए गए विस्तृत अध्ययन में शोधकर्ताओं ने डॉल्फिन को सबसे अधिक बार दर्ज किया।

‘स्टेटस सर्वे ऑफ डुगोंग एंड अदर मरीन मैमल्स, एंड इकोलॉजिकल असेसमेंट ऑफ सीग्रास हैबिटेट्स अराउंड नरारा एंड एडजसेंट आइलैंड, गल्फ ऑफ कच्छ’ नाम से किए गए इस अध्ययन में दक्षिण कच्छ की खाड़ी स्थित मरीन नेशनल पार्क, मरीन सेंचुरी और आसपास के क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया गया।

वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार प्राकृतिक विरासत और समुद्री जैव-विविधता के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण के दौरान शोधकर्ताओं को 64 बार डॉल्फिन दिखाई दीं और कुल 193 डॉल्फिन दर्ज की गईं।

बोट के माध्यम से किए गए इस सर्वेक्षण में रीफ के किनारे, ज्वार-भाटा की नहरें, द्वीपों की सीमाएं और उथले तटीय क्षेत्रों को शामिल किया गया। सर्वे के दौरान कुल 177 बार समुद्री जीवों के समूह देखे गए, जिनमें 342 समुद्री स्तनधारी जीव दर्ज किए गए। इनमें डॉल्फिन की हिस्सेदारी 36.2 प्रतिशत रही, जो सर्वाधिक थी।

वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने अध्ययन के लिए गीर फाउंडेशन की टीम और समुद्री मेगाफौना के संरक्षण के लिए वन विभाग के प्रयासों की सराहना की।

वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव विनोद राव ने बताया कि नरारा रीफ डॉल्फिन की मौजूदगी का सबसे प्रमुख क्षेत्र रहा, जहां 14 बार 39 डॉल्फिन देखी गईं। इसके बाद देड़का-मुंडेका द्वीप समूह में 12 बार 41 डॉल्फिन, पिरोटन द्वीप पर 32 डॉल्फिन, धाणी द्वीप पर 9 बार 28 डॉल्फिन और सिक्का के तटीय क्षेत्रों में 8 बार 26 डॉल्फिन दर्ज की गईं।

अन्य सर्वेक्षण स्थलों पर 10 बार 27 डॉल्फिन देखी गईं।

गीर फाउंडेशन के निदेशक बी.पी. पति ने बताया कि डॉल्फिन मुख्य रूप से रीफ की सीमाओं, द्वीपों के किनारों, ज्वार-भाटा की नहरों और खुले समुद्री जल में दिखाई दीं। उनके अनुसार ये क्षेत्र डॉल्फिन के आवागमन और भोजन प्राप्त करने के लिए सबसे अनुकूल हैं।

खाड़ी की तेज ज्वारीय धाराएं पोषक तत्वों और मछलियों को एकत्रित करती हैं, जिससे डॉल्फिन के लिए शिकार करना आसान हो जाता है।

अध्ययन में देड़का-मुंडेका द्वीप समूह को डॉल्फिन के लिए महत्वपूर्ण आवागमन मार्ग पाया गया। यहां डॉल्फिन को गहरी रीफ सीमाओं और ज्वारीय नहरों के साथ लगातार आवाजाही करते देखा गया, जहां मछलियों के बड़े समूह मौजूद रहते हैं।

बी.पी. पति ने कहा कि अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह रहा कि डॉल्फिन पूरे साल दक्षिण कच्छ की खाड़ी में दिखाई दीं। इससे संकेत मिलता है कि डॉल्फिन की आबादी का एक हिस्सा इस क्षेत्र में स्थायी या अर्ध-स्थायी रूप से निवास करता है, न कि केवल किसी विशेष मौसम में यहां आता है।

सर्वेक्षण के दौरान डॉल्फिन के कई रोचक व्यवहार भी दर्ज किए गए। शोधकर्ताओं ने उन्हें समूह में तैरते, नियमित रूप से पानी की सतह पर आते, ज्वारीय धाराओं के साथ दिशा बदलते और भोजन की तलाश में विशेष तरीके से शिकार करते देखा। सर्वे में एक-दो डॉल्फिन से लेकर 16 डॉल्फिन तक के समूह दर्ज किए गए, जो उनके सामाजिक व्यवहार को दर्शाता है।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) जयपाल सिंह ने कहा कि दक्षिण कच्छ की खाड़ी रीफ, सीग्रास मैदानों और ज्वार-भाटा की नहरों से मिलकर बना एक गतिशील समुद्री आवास है, जो अनेक समुद्री प्रजातियों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है।

उनके अनुसार डॉल्फिन के लिए ज्वारीय नहरें और खुले तटीय जल विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यही उनके आवागमन और भोजन के प्रमुख क्षेत्र हैं।

गीर फाउंडेशन के उप निदेशक अमितकुमार नायक ने कहा कि विभिन्न मौसमों में अलग-अलग स्थानों पर लगातार डॉल्फिन की मौजूदगी दर्ज होना भविष्य के संरक्षण प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण आधाररेखा साबित होगा। इससे डॉल्फिन की आबादी के रुझानों को समझने और कच्छ की खाड़ी को उनके सुरक्षित आवास के रूप में संरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

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