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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:15 · नई दिल्ली संस्करण

इंग्लैंड में हीट वेव का कहर, मृतकों की संख्या बढ़ी

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
इंग्लैंड में हीट वेव का कहर, मृतकों की संख्या बढ़ी

लंदन। यूरोप जुलाई महीने में भी गर्मी से झुलस रहा है। इंग्लैंड में इस वर्ष मई और जून के दौरान पड़ी भीषण गर्मी (हीटवेव) से होने वाली अतिरिक्त मौतों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुनी हो गई है। ब्रिटेन की यूके हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी (यूकेएचएसए) की एक अंतरिम रिपोर्ट के अनुसार, इस साल अब तक हीटवेव से जुड़ी अनुमानित 2,877 अतिरिक्त मौत दर्ज की गई हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, 24 से 27 मई के बीच आई हीटवेव के दौरान लगभग 753 अतिरिक्त मौतें हुईं, जबकि 21 से 28 जून के बीच पड़ी दूसरी भीषण गर्मी में 2,124 लोगों की मौत का अनुमान है।

यह आंकड़ा पिछले वर्ष जून से अगस्त 2025 के दौरान दर्ज हीटवेव से जुड़ी मौतों की तुलना में लगभग दोगुना है।

यूकेएचएसए ने कहा कि हालांकि ये आंकड़े अभी अंतरिम हैं, लेकिन वे पहले ही 2022 में दर्ज वार्षिक रिकॉर्ड के करीब पहुंच चुके हैं, जो अब तक का सबसे खराब वर्ष माना जाता है।

विशेषज्ञों ने बढ़ती गर्मी को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में तत्काल कमी लाने और लोगों को जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न अत्यधिक गर्मी के प्रभाव से बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

रिपोर्ट के अनुसार, जून में पड़ी भीषण गर्मी के दौरान यूकेएचएसए और मौसम विज्ञान विभाग ने लगातार तीन दिनों तक रेड अलर्ट जारी किया था। यह चेतावनी जीवन के लिए गंभीर खतरे का संकेत देती है। एजेंसियों ने कहा कि अत्यधिक तापमान और उमस के कारण बुजुर्ग, छोटे बच्चे और पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोग सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं।

इससे पहले, फ्रांस ने जून महीने में अतिरिक्त लोगों की मौत का एक भयावह आंकड़ा जारी किया था।

बताया था कि भीषण गर्मी से करीब 1,000 अतिरिक्त लोगों की मौत हुई। 3 जुलाई को फ्रांस की मौसम एजेंसी मेटेओ-फ्रांस ने अपनी मासिक जलवायु रिपोर्ट में कहा कि जून 2026 (वर्ष 1947 में रिकॉर्ड रखना शुरू होने के बाद से) फ्रांस का सबसे गर्म जून रहा।

इस दौरान औसत तापमान 22.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो 1991-2020 के औसत से 3.8 डिग्री सेल्सियस अधिक है।

फ्रांस और यूके ही नहीं बल्कि यूरोप के अन्य देश भी इस साल हीट वेव की गिरफ्त में रहे और ये सिलसिला अब भी जारी है। मौसम वैज्ञानिकों ने यूरोप की गर्मी की वजह 'हीट डोम इफेक्ट' को बताया था।

विशेषज्ञों के अनुसार, स्पेन के तट के पास बनने वाला ठंडी हवा का दबाव क्षेत्र और पश्चिमी यूरोप पर मजबूत उच्च दबाव प्रणाली मिलकर "हीट डोम" प्रभाव पैदा कर सकती है। इस स्थिति में गर्म हवा वातावरण में फंस जाती है और लगातार सतह पर लौटकर तापमान बढ़ा देती है।

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