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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:04 · नई दिल्ली संस्करण

सुप्रीम कोर्ट में आज नीट पेपर लीक पर सुनवाई

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन

नई

दिल्ली, । सुप्रीम कोर्ट आज राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश

परीक्षा (नीट) पेपर लीक मामले पर सुनवाई करेगा। केंद्र सरकार ने मद्रास

आईआईटी के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा है कि परीक्षा में बड़े पैमाने पर

गड़बड़ी के सुबूत नहीं हैं और वह नीट निरस्त करने के समर्थन में नहीं है।

राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) ने भी सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर

कहा है कि टेलीग्राम ऐप पर पेपर लीक का जो वीडियो चलाया जा रहा था वह

फर्जी था।

इससे पहले आठ जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से अब तक की

जांच की स्टेटस रिपोर्ट तलब की थी। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की

अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि परीक्षा की पवित्रता प्रभावित हुई है यह

तो स्पष्ट है। अगर परीक्षा वाले दिन ही बच्चों को पेपर मिला था और उसे याद

किया गया। इसका मतलब पेपर केवल स्थानीय स्तर पर ही लीक हुआ था। अगर हमें

यह पता नहीं चलता कि कितने स्टूडेंट्स इसमें शामिल थे, तब दोबारा परीक्षा

का आदेश देना पड़ेगा।

चीफ जस्टिस ने कहा था कि हमें यह भी देखना होगा कि

पेपर लीक कैसे हुआ। अगर सोशल मीडिया के जरिए हुआ, तो इसका मतलब यह हुआ कि

बड़े पैमाने पर पेपर लीक हुआ होगा। चीफ जस्टिस ने कहा था कि हम जानना चाहते

हैं कि पेपर सेटिंग की पूरी प्रक्रिया क्या होती है। प्रिंटिंग प्रेस में

कैसे और किसके साथ भेजा गया। प्रेस से बैंक में कैसे भेजा गया । इससे पता

लगाने में आसानी होगी कि पेपर कहां से लीक हुआ।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा

था कि पेपर लीक हुआ है इसमें दोराय नहीं है। अब यह देखना है कि यह कैसे हुआ

है और कितना हुआ है। चीफ जस्टिस ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा था

कि अगर परीक्षा कैंसल नहीं होती तो धांधली से पास हुए स्टूडेंट्स को कैसे

चिह्नित करेंगे। उनको पता करने के लिए क्या किया गया है।

चीफ जस्टिस ने

कहा था कि हम संविधान पीठों की तरह एक नोडल एडवोकेट नियुक्त कर सकते हैं

ताकि वो सभी पक्षकारों की लिखित दलीलों को संग्रहित कर कोर्ट के सामने रख

सके। कोर्ट ने कहा कि हम सरकार से ये जानना चाहते हैं कि उसने लाभार्थियों

की पहचान करने के लिए अब तक क्या किया है। चीफ जस्टिस ने कहा की सौ फीसदी

अंक 67 छात्रों को मिले हैं। हमें इस बात को भी समझना होगा की मार्क्स देने

का पैटर्न क्या है। अगर एक बार के लिए हम यह मान लें कि हम परीक्षा रद्द

नहीं करते हैं तो धोखाधड़ी के लाभार्थियों की पहचान करने के लिए क्या किया

जा रहा है।

चीफ जस्टिस ने मेहता से कहा कि आप सरकार से पूछ कर बताइए क्या

हम साइबर फॉरेंसिक विभाग में डेटा एनालिटिक्स प्रोग्राम के माध्यम से यह

पता नहीं लगा सकते कि क्या पूरी परीक्षा प्रभावित हुई है। क्या गलत करने

वालों की पहचान करना संभव है। उस स्थिति में केवल उन छात्रों के लिए दोबारा

परीक्षा का आदेश दिया जा सकता है।

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