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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 9:21 · नई दिल्ली संस्करण

तिहाड़ में बंद यासिन मलिक का तत्काल इलाज कराने की मांग पर एनआईए को नोटिस

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
तिहाड़ में बंद यासिन मलिक का तत्काल इलाज कराने की मांग पर एनआईए को नोटिस

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने हत्या और टेरर फंडिंग मामले में तिहाड़ जेल में सजा काट रहे यासिन मलिक को एम्स या कश्मीर में तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग पर सुनवाई करते हुए नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) को नोटिस जारी किया है। जस्टिस अनूप कुमार मेंहदीरत्ता ने यासिन मलिक की मेडिकल स्टेटस रिपोर्ट तलब करके मामले की अगली सुनवाई 11 नवंबर को करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने जेल अधीक्षक को यासिन मलिक को जरूरी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। यासिन मलिक 01 नवंबर से जेल में भूख हड़ताल पर है। सुनवाई के दौरान यासिन मलिक की ओर से पेश वकील ने कहा कि भूख हड़ताल की वजह से याचिकाकर्ता की तबीयत खराब हो गई है। यहां तक कि वो अपने पैरों पर भी खड़ा नहीं हो पा रहा है। याचिकाकर्ता को स्ट्रेचर पर रखा गया है। ये एक बेहत आपात स्थिति है। याचिकाकर्ता के जीवन और मौत के बीच फासला कम है।इससे पहले 25 मई, 2022 को पटियाला हाउस कोर्ट ने हत्या और टेरर फंडिंग के मामले में दोषी करार दिए गए यासिन मलिक को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने यासिन मलिक पर यूएपीए की धारा 17 के तहत उम्रकैद और दस लाख रुपये का जुर्माना, धारा 18 के तहत दस साल की कैद और दस हजार रुपये का जुर्माना, धारा 20 के तहत दस वर्ष की सजा और 10 हजार रुपये का जुर्माना, धारा 38 और 39 के तहत पांच साल की सजा और पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। कोर्ट ने यासिन मलिक पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी के तहत दस वर्ष की सजा और दस हजार रुपये का जुर्माना, धारा 121ए के तहत दस साल की सजा और दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। कोर्ट ने कहा था कि यासिन मलिक को मिली ये सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इसका मतलब अधिकतम उम्रकैद की सजा और दस लाख रुपये की सजा प्रभावी होगी।यासिन मलिक ने 10 मई, 2022 को अपना गुनाह कबूल कर लिया था। 16 मार्च, 2022 को कोर्ट ने हाफिज सईद, सैयद सलाहुद्दीन, यासिन मलिक, शब्बीर शाह और मसरत आलम, राशिद इंजीनियर, जहूर अहमद वताली, बिट्टा कराटे, आफताफ अहमद शाह, अवतार अहम शाह, नईम खान, बशीर अहमद बट्ट ऊर्फ पीर सैफुल्ला समेत दूसरे आरोपितों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था। एनआईए के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के सहयोग से लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन, जेकेएलएफ, जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों ने जम्मू-कश्मीर में आम नागरिकों और सुरक्षा बलों पर हमले और हिंसा को अंजाम दिया। वर्ष 1993 में अलगाववादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए आल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस की स्थापना की गई।एनआईए के मुताबिक हाफिज सईद ने हुर्रियत कांफ्रेंस के नेताओं के साथ मिलकर हवाला और दूसरे चैनलों के जरिये आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए धन का लेन-देन किया। इस धन का उपयोग वे घाटी में अशांति फैलाने, सुरक्षा बलों पर हमला करने, स्कूलों को जलाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का काम किया। इसकी सूचना गृह मंत्रालय को मिलने के बाद एनआईए ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 121, 121ए और यूएपीए की धारा 13, 16, 17, 18, 20, 38, 39 और 40 के तहत केस दर्ज किया था। पटियाला हाउस कोर्ट के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए एनआईए ने यासिन मलिक की फांसी की सजा की मांग की है। ये याचिका अभी हाई कोर्ट में लंबित है।

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