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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:44 · नई दिल्ली संस्करण

गुजरात पुलिस ने जेल में बंद महिला और उसके नवजात शिशु को सुरक्षित पहुंचाया घर

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
गुजरात पुलिस ने जेल में बंद महिला और उसके नवजात शिशु को सुरक्षित पहुंचाया घर

खेड़ा (गुजरात)। गुजरात के खेड़ा जिले में एक बेहद मानवीय और भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां प्रशासन और पुलिस ने एक विचाराधीन महिला और उसके नवजात शिशु की सुरक्षा तथा घर वापसी की जिम्मेदारी अपने हाथों में ली। यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ी है, बल्कि इसमें इंसानियत की एक प्रेरणादायक मिसाल भी देखने को मिली।

आनंद स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और नडियाद जिला जेल प्रशासन ने एक बेसहारा प्रवासी महिला तथा उसके नवजात बच्चे की मदद की। यह महिला एक आपराधिक मामले में विचाराधीन थी और हाल ही में उसने जेल में ही एक बच्चे को जन्म दिया था। जमानत मिलने के बाद जब उसे रिहा किया गया, तो उसे घर ले जाने के लिए उसका कोई परिजन आगे नहीं आया।

सूत्रों के अनुसार, यह मामला खंभात क्षेत्र से जुड़ा है, जहां पोक्सो अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में महिला को उसके पति और देवर के साथ सह-आरोपी बनाया गया था। परिवार मूल रूप से मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले का रहने वाला है और रोजगार की तलाश में गुजरात आया था।

महिला जब नडियाद जिला जेल में थी, तब वह गर्भवती थी और उसके साथ उसका दो वर्षीय बच्चा भी था।

21 मई को उसे प्रसव पीड़ा हुई, जिसके बाद उसे पहले नडियाद सिविल अस्पताल और फिर बेहतर उपचार के लिए अहमदाबाद सिविल अस्पताल भेजा गया। वहां उसने एक स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया। उपचार के बाद उसे वापस नडियाद जिला जेल लाया गया, जहां वह अपने दोनों छोटे बच्चों के साथ रह रही थी।

जमानत मिलने के बावजूद स्थिति कठिन बनी रही, क्योंकि उसका पति और देवर अभी भी हिरासत में थे और परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि कोई भी सदस्य उसे लेने नहीं आ सका। ऐसे में वह महिला अपने नवजात और छोटे बच्चे के साथ असहाय स्थिति में थी।

इसी दौरान नडियाद जिला जेल प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उसकी मदद करने का निर्णय लिया। गुजरात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. के.एल.एन. राय के मार्गदर्शन में एक विशेष वाहन की व्यवस्था की गई, ताकि महिला और उसके बच्चों को सुरक्षित रूप से उनके गृह राज्य मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले तक पहुंचाया जा सके।

इस पूरी प्रक्रिया में एक स्थानीय धर्मार्थ संस्था ने भी सहयोग दिया। यात्रा के दौरान दो पुलिसकर्मी महिला और उसके दोनों बच्चों के साथ लगातार मौजूद रहे, ताकि उनकी सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित की जा सके।

मध्य प्रदेश पहुंचने पर स्थानीय पुलिस को भी सूचना दी गई और आपसी समन्वय के साथ महिला को उसके परिवार से मिला दिया गया।

इस लंबे सफर के बाद जब महिला अपने घर और परिजनों से मिली, तो यह पल उसके लिए भावनात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण था।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा प्रयास केवल कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं था, बल्कि मानवता और संवेदनशील प्रशासन की एक मिसाल भी है। परिवार ने भी गुजरात पुलिस, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और जेल प्रशासन का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने कठिन समय में उनका साथ दिया और उनकी सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की।

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