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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:24 · नई दिल्ली संस्करण

एमपी हाईकोर्ट ने सरकार से यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री स्थल पर दूषित मिट्टी और भूजल के लिए योजना पेश करने को कहा

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
एमपी हाईकोर्ट ने सरकार से यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री स्थल पर दूषित मिट्टी और भूजल के लिए योजना पेश करने को कहा

भोपाल। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राज्य सरकार को भोपाल में बंद हो चुकी यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास के दूषित मिट्टी और भूजल के आकलन और ठीक करने के लिए 23 मार्च तक विस्तृत योजना पेश करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह और अजय कुमार निरंकारी की पीठ ने भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के लिए काम कर रहे एक गैर-सरकारी संगठन की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया है। याचिका में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास के दूषित मिट्टी और भूजल के उपचार और समयबद्ध कार्रवाई की मांग की गई थी।

याचिका के जवाब में, राज्य सरकार ने एक हलफनामा दाखिल कर कहा कि दूषित मिट्टी और भूजल के आकलन और आसपास के क्षेत्र की सफाई के लिए टेंडर सहित उपचार योजना पर काम चल रहा है और कुछ और समय मांगा है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को तय की।

इस बीच, भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के उप सचिव कृष्णकांत दुबे की ओर से हस्ताक्षरित हलफनामे में कहा गया है कि विभाग ने 2023 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित निगरानी समिति/कार्यबल के निर्देशों के अनुपालन में 5 मार्च को एक बैठक आयोजित की थी।

हलफनामे में कहा गया है कि अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में पूर्व यूसीआईएल परिसर और उसके आसपास की दूषित मिट्टी और भूजल के उपचार के आकलन, जंग लगे संयंत्र के विषहरण और विसंक्रमण तथा समयबद्ध उपचार जैसे विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।

हलफनामे में कहा गया है कि निगरानी समिति ने सुझाव दिया था कि प्रदेश सरकार एनईईआरआई और एनजीआरआई की सहायता से मिट्टी और भूजल प्रदूषण, साथ ही पारे के रिसाव और भूजल में जमा हुए कचरे की मात्रा निर्धारित करने के लिए नए अध्ययन करा सकती है।

इस संबंध में, राज्य सरकार ने अध्ययन करने के लिए एक एजेंसी/एजेंसियों के समूह की पहचान और अंतिम रूप देने सहित कार्य योजना पेश की है

हलफनामे में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि राज्य सरकार ने 87.74 एकड़ भूमि (यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री स्थल) का उपयोग स्मारक की स्थापना सहित विभिन्न अन्य उद्देश्यों के लिए करने का निर्णय लिया है और इसके लिए एक कार्य योजना तैयार की जाएगी।

बंद हो चुकी यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से निकला 337 टन जहरीला कचरा एक जनवरी, 2025 को भोपाल से पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थानांतरित किया गया और जून 2025 के अंत तक एक निजी अपशिष्ट उपचार संयंत्र में पूरी तरह से जला दिया गया।

इस जहरीले कचरे का निपटान भोपाल गैस त्रासदी के 40 साल से अधिक समय बाद हुआ, जो 2-3 दिसंबर, 1984 को हुई थी और जिसमें 5,000 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। हालांकि, फैक्ट्री स्थल की दूषित मिट्टी और उससे कुछ मीटर की दूरी पर स्थित तीन तालाब (फैक्ट्री स्थल के उत्तर दिशा में) अभी भी अधिकारियों के लिए एक चुनौती बने हुए हैं।

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