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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 7:38 · नई दिल्ली संस्करण

महिलाओं की उद्यमिता में बढ़ता रुझान, स्टार्टअप के जरिए बना रहीं नई पहचान

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
महिलाओं की उद्यमिता में बढ़ता रुझान, स्टार्टअप के जरिए बना रहीं नई पहचान

गीदम विकासखंड में प्रशिक्षण से शुरू हुई स्व-रोजगार की सराहनीय पहलरायपुर। बस्तर जैसे वन संपन्न क्षेत्र में अब महिलाएं उद्यमिता के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। गीदम विकासखंड में उद्यमिता विकास प्रशिक्षण से प्रेरित होकर कई महिलाओं ने स्वरोजगार की दिशा में नए प्रयास शुरू किए हैं। यह पहल महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही है।गीदम की महिला उद्यमी रेणु पोटाम ने प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अपनी टीम “महिला साहिता समूह” के साथ पत्तल एवं दोना निर्माण का कार्य शुरू करने का निर्णय लिया। उन्होंने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिए आयोजित उद्यमिता विकास कार्यक्रम में प्रशिक्षण लिया। इस योजना में छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम को नोडल एजेंसी बनाया गया है। जिले में यह प्रशिक्षण चॉइस कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा, उद्योग विभाग दंतेवाड़ा के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को व्यवसाय प्रबंधन, बाजार की जानकारी, लागत निर्धारण, ब्रांडिंग और शासकीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।प्रशिक्षण से प्रेरित होकर रेणु पोटाम ने साल और अन्य वन पत्तों से पर्यावरण अनुकूल पत्तल और दोना बनाने की शुरुआत की। बस्तर क्षेत्र में कच्चा माल आसानी से उपलब्ध होने के कारण यह कार्य लाभकारी साबित हो रहा है। प्लास्टिक के विकल्प के रूप में इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। उनका लक्ष्य इन उत्पादों को स्थानीय बाजार के साथ पर्यटन गतिविधियों से जोड़ना है, ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को रोजगार मिल सके।रेणु पोटाम अब अपने उद्यम को औपचारिक रूप से पंजीकृत कर प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत ऋण लेने की तैयारी कर रही हैं। ऋण से आधुनिक मशीनें खरीदी जाएंगी, जिससे उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता में वृद्धि होगी।लघु वनोपज और पारंपरिक उत्पादों को मिल रही पहचानइसी क्रम में लुनिता चिमनकर ने लघु वनोपज से पौष्टिक गोंद के लड्डू बनाने का व्यवसाय शुरू किया है। उनका उद्देश्य स्थानीय वन उत्पादों को मूल्य संवर्धन के साथ बाजार तक पहुंचाना है। प्रेमलता यादव ने प्रशिक्षण के माध्यम से व्यवसाय संचालन की जानकारी लेकर छत्तीसगढ़ की पारंपरिक मिठाइयों को व्यावसायिक पहचान देने का संकल्प लिया है।नगर पंचायत गीदम की सुचिता जैन ने केक, बिस्कुट और अन्य बेकरी उत्पादों का निर्माण शुरू कर स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया है। उनकी पहल से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं और अन्य महिलाएं भी प्रेरित हो रही हैं।महिला सशक्तिकरण की नई मिसालउद्यमिता विकास कार्यक्रम के माध्यम से गीदम क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण की नई कहानी लिखी जा रही है। वन संपदा, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक प्रशिक्षण के समन्वय से यहां की महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। इन प्रयासों से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, बल्कि वे पूरे बस्तर क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन रही हैं।

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