आम आदमी" की सरकार या वीआईपी सुविधाओं की भूखी पार्टी? – केजरीवाल सरकार पर फिजूलखर्ची का बड़ा आरोप

"आम आदमी" की सरकार या वीआईपी सुविधाओं की भूखी पार्टी? – केजरीवाल सरकार पर फिजूलखर्ची का बड़ा आरोप
नई दिल्ली, 17 जुलाई 2025 –
दिल्ली की राजनीति में “सादगी” और “ईमानदारी” का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी (AAP) एक बार फिर कटघरे में है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री आशीष सूद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गंभीर आरोप लगाए हैं कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और आतिशी जैसे नेताओं ने आम आदमी के टैक्स के पैसों का दुरुपयोग करते हुए करोड़ों के महंगे मोबाइल फोन खरीदे। यह खरीद उन सरकारी दिशा-निर्देशों के विरुद्ध की गई, जो खुद केजरीवाल सरकार ने 2013 में तय किए थे।
प्रेस वार्ता में आशीष सूद ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि दिल्ली सरकार ने 2013 में एक स्पष्ट गाइडलाइन जारी की थी, जिसमें मुख्यमंत्री को अधिकतम ₹50,000 और अन्य मंत्रियों को ₹45,000 तक का मोबाइल फोन खरीदने की अनुमति दी गई थी। लेकिन AAP नेताओं ने इस सीमा का उल्लंघन करते हुए लगातार महंगे आईफोन खरीदे और वह भी सरकारी धन से। उन्होंने चार बड़ी खरीद का ब्यौरा सार्वजनिक किया:
1 दिसंबर 2015 को iPhone 6s Plus – ₹81,000
12 सितंबर 2017 को iPhone 7 Plus – ₹69,000
4 दिसंबर 2020 को कोविड महामारी के दौरान iPhone 12 Pro Max – ₹1,39,900
13 जुलाई 2022 को iPhone 13 Pro Max – ₹1,63,900
इन आंकड़ों से यह स्पष्ट हो गया है कि AAP नेताओं के लिए “आम आदमी” की परिभाषा केवल भाषणों तक सीमित रही, जबकि हकीकत में वे वीआईपी सुविधा और भोग-विलास की राजनीति में लिप्त रहे। विशेष रूप से कोविड काल में, जब लाखों लोग ऑक्सीजन, दवाइयों और अस्पतालों के लिए संघर्ष कर रहे थे, उस समय जनता के पैसे से इन नेताओं ने ऐश्वर्यपूर्ण मोबाइल फोन खरीदे।
आशीष सूद ने कड़ा सवाल उठाते हुए कहा –
“जब सरकारी आदेश के अनुसार फोन की सीमा ₹45,000 से ₹50,000 थी, तो लाखों के फोन किस हक से खरीदे गए? और क्या ये पैसा जनता की गाढ़ी कमाई से नहीं आया?”
उन्होंने इसे न केवल दिशानिर्देशों का उल्लंघन बताया, बल्कि एक नैतिक भ्रष्टाचार करार दिया – ऐसा भ्रष्टाचार जो दिखाता है कि सत्ता में आने के बाद कैसे नेता आम जनता से कटकर विशेषाधिकारों में डूब जाते हैं।
उन्होंने कहा कि आज की आम आदमी पार्टी, असल में "आम आदमी" की नहीं, बल्कि सत्ता के ऐश्वर्य में विकसित होती पार्टी बन चुकी है। जो पार्टी सादगी और पारदर्शिता के नाम पर सत्ता में आई थी, वही अब भ्रष्टाचार और भोगवाद की मिसाल बन गई है।
AAP ने अपने बचाव में कहा है कि इन मोबाइल फोनों का इस्तेमाल सरकारी कार्यों, ईमेल्स, संवेदनशील फाइल्स और शिकायत निवारण के लिए किया गया, इसलिए महंगे फोन लेना कार्य-नैतिक जरूरत थी। हालांकि, इसी बीच दिल्ली सरकार ने हाल ही में मोबाइल की सीमा को संशोधित करते हुए अब मुख्यमंत्री के लिए ₹1.5 लाख और मंत्रियों के लिए ₹1.25 लाख की अनुमति दे दी है। यह बदलाव 9 जुलाई 2025 को अधिसूचित हुआ, जबकि सवाल उठाए गए खर्च इससे बहुत पहले के हैं।
अब जनता सवाल कर रही है –
“अगर खुद को आम आदमी कहते हैं तो लाखों रुपये के मोबाइल फोन क्यों? और क्या ये सादगी और ईमानदारी के आदर्शों से मेल खाता है?”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस खुलासे ने आम आदमी पार्टी की छवि को गहरा झटका दिया है। जिस ‘सादगी’ की दुहाई देकर AAP सत्ता में आई थी, वही अब सबसे बड़े सवाल के घेरे में है। क्या यह केवल तकनीकी उल्लंघन है या नैतिक पतन की निशानी?





