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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:47 · नई दिल्ली संस्करण

Government has currently withheld consent for the demand to add 'Bhumihar Brahmin' to the caste certificate.

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
Government has currently withheld consent for the demand to add 'Bhumihar Brahmin' to the caste certificate.

पटना। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन जाति प्रमाण पत्र और सरकारी अभिलेखों में दर्ज जाति के नाम को लेकर सदन में व्यापक चर्चा हुई। भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने सरकार से मांग की कि जाति प्रमाण पत्रों और सरकारी जाति सूची में केवल "भूमिहार" के स्थान पर "भूमिहार ब्राह्मण" अंकित किया जाए। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया कि फिलहाल इस संबंध में कोई नया निर्णय लेने का प्रस्ताव नहीं है।

ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से मुद्दा उठाते हुए भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने कहा कि राज्य के भू-राजस्व अभिलेखों, पुराने सरकारी दस्तावेजों, जिला गजट और अन्य शासकीय रिकॉर्ड में कई स्थानों पर "भूमिहार ब्राह्मण" का उल्लेख मिलता है, जबकि वर्तमान में जारी जाति प्रमाण पत्रों और सरकारी जाति सूची में केवल "भूमिहार" लिखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है और प्रमाण पत्र बनवाने में भी व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में विभिन्न सामाजिक संगठनों और लोगों की ओर से सरकार को कई आवेदन दिए जा चुके हैं। उनके अनुसार, सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से पूर्व में जारी एक पत्र में भी "भूमिहार" के स्थान पर "भूमिहार ब्राह्मण" लिखने का उल्लेख किया गया था। ऐसे में सरकार को सभी सरकारी अभिलेखों और जाति प्रमाण पत्रों में एकरूपता सुनिश्चित करनी चाहिए।

सरकार की ओर से जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि सामान्य प्रशासन विभाग ने उच्च जाति, अल्पसंख्यक एवं अन्य वर्गों के जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्धारित किए हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान सूची में उच्च जातियों के अंतर्गत भूमिहार, ब्राह्मण, राजपूत और कायस्थ को अलग-अलग श्रेणियों में सूचीबद्ध किया गया है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर फिलहाल सरकार के समक्ष कोई नया प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

सरकार के इस जवाब के बाद सदन में कुछ भूमिहार विधायकों ने असंतोष जताया। भाजपा विधायक विशाल प्रशांत ने सरकार के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि यदि सरकार भूमिहार समुदाय को "भूमिहार ब्राह्मण" के रूप में मान्यता देने को तैयार नहीं है, तो उन्हें अनुसूचित जनजाति (एसटी) में शामिल कर दिया जाए। उन्होंने दावा किया कि भूमिहार समाज के अनेक लोग सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं तथा सरकार उनकी पारंपरिक पहचान को समाप्त करने का प्रयास कर रही है।

सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर हुई बहस के बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया। हालांकि, सरकार ने अपने वर्तमान रुख में किसी बदलाव के संकेत नहीं दिए हैं।-

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