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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:37 · नई दिल्ली संस्करण

भारत में तेजी से बढ़ रहा जीसीसी इकोसिस्टम, फुटप्रिंट 350 मिलियन स्क्वायर फीट के पार पहुंचने का अनुमान: रिपोर्ट

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
भारत में तेजी से बढ़ रहा जीसीसी इकोसिस्टम, फुटप्रिंट 350 मिलियन स्क्वायर फीट के पार पहुंचने का अनुमान: रिपोर्ट

मुंबई। भारत में पिछले दो वर्षों में 200 से अधिक नए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) खुले हैं और कुल जीसीसी फुटप्रिंट अगले तीन से चार वर्षों में 350 मिलियन स्क्वायर फीट पहुंचने का अनुमान है। यह जानकारी मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।

जेएलएल की रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में जीसीसी लीजिंग गतिविधियां 2025 में रिकॉर्ड 31 मिलियन स्क्वायर फीट पर पहुंच गई हैं। यह बड़े महानगरों में तेजी से बढ़ते जीसीसी इकोसिस्टम को दिखाता है।

रिपोर्ट में बताया गया कि देश में महानगर अलग-अलग जीसीसी केंद्रों के रूप में विकसित हो रहे हैं और हर किसी की अलग प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता है।

900 से अधिक यूनिट्स के साथ बेंगलुरु की जीसीसी मार्केट में हिस्सेदारी 34-39 प्रतिशत है।

हैदराबाद की जीसीसी मार्केट में हिस्सेदारी करीब 20-23 प्रतिशत है और यह हेल्थकेयर-बायोटेक सेक्टर में लीडर बना हुआ है।

जेएलएल के भारत में मुख्य अर्थशास्त्री और अनुसंधान एवं आरईआईएस डॉ.समंतक दास ने कहा, “आंकड़े निरंतर विकास और परिपक्वता की एक सशक्त कहानी बयां करते हैं। जीसीसी की मौजूदा गतिविधियों का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा टियर 1 शहरों में केंद्रित है। इन केंद्रों के पास शीर्ष सात शहरों में 263 मिलियन वर्ग फुट से अधिक ग्रेड ए कार्यालय है, जबकि पिछले दशक में ऑफिस लीजिंग की कुल गतिविधियों का 40 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं शहरों से जुड़ा रहा है।”

रिपोर्ट में आगे कहा गया कि पुणे की जीसीसी गतिविधियों में हिस्सेदारी बीते चार वर्षों में 15-20 प्रतिशत रही है।

यह शहर अच्छी जीवन गुणवत्ता, कौशल की उपलब्धता और अपने रणनीतिक स्थान के कारण कई बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों को आकर्षित करने में सफल रहा है।

बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे अन्य प्रमुख महानगरों का लंबे समय से बाजार पर दबदबा रहा है, लेकिन अब वैश्विक उद्यमों द्वारा भारत के द्वितीय श्रेणी के शहरों की अपार संभावनाओं को पहचानने के साथ ही एक बदलाव देखने को मिल रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है, “अहमदाबाद के औद्योगिक और गिफ्ट सिटी कॉरिडोर से लेकर कोलकाता और जयपुर की सांस्कृतिक राजधानियों तक, द्वितीयक शहर तेजी से व्यापारिक केंद्रों में परिवर्तित हो रहे हैं। यह केवल भौगोलिक विस्तार नहीं है; यह मजबूत व्यापारिक अर्थव्यवस्था और उभरते अवसरों से प्रेरित एक रणनीतिक विकास है।”

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