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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:03 · नई दिल्ली संस्करण

गया सेंट्रल जेल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट निलंबित, कैदियों से मिलीभगत और नियमों के उल्लंघन के आरोप

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
गया सेंट्रल जेल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट निलंबित, कैदियों से मिलीभगत और नियमों के उल्लंघन के आरोप

पटना। बिहार गृह विभाग ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए गया सेंट्रल जेल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट सुदर्शन प्रसाद सिंह को निलंबित कर दिया है। उन पर लापरवाही, जेल नियमों के उल्लंघन और कैदियों से कथित मिलीभगत के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

गृह विभाग के कारा प्रभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, विभागीय जांच पूरी होने तक सुदर्शन प्रसाद सिंह निलंबित रहेंगे। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय मुजफ्फरपुर स्थित खुदीराम बोस सेंट्रल जेल निर्धारित किया गया है।

आदेश में उनके खिलाफ कई गंभीर आरोपों का उल्लेख किया गया है।

इनमें जेल परिसर से गांजा बरामद होने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं करना, बिना अनुमति कैदियों की बाहरी लोगों से मुलाकात कराना, जेल सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करना, जेल कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार और कैदियों के साथ मारपीट व अमानवीय व्यवहार शामिल हैं।

मामले की शुरुआत 16 जून को हुई, जब जेल के एक वार्ड में तलाशी अभियान चलाया गया।

तलाशी के दौरान बंदी रमेश यादव उर्फ सुमन यादव के पास से कथित तौर पर गांजा बरामद हुआ था।

विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, जेल अधीक्षक ने डिप्टी सुपरिटेंडेंट को आरोपी बंदी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया था, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर ऐसा नहीं किया। गृह विभाग ने इसे कर्तव्य में गंभीर लापरवाही माना है।

रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि सुदर्शन प्रसाद सिंह ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना अपने कार्यालय में कैदियों से उनके परिजनों और अन्य बाहरी लोगों की मुलाकात कराई। कई आगंतुकों को बिना अनिवार्य सुरक्षा जांच के प्रवेश दिया गया और उनके नाम जेल के विजिटर रजिस्टर में भी दर्ज नहीं किए गए।

विभाग का कहना है कि वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें कई बार मौखिक रूप से चेतावनी दी थी, लेकिन इसके बावजूद कथित अनियमितताएं जारी रहीं।

जेल कर्मचारियों ने भी उनके खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई हैं। आरोप है कि सुरक्षा नियम लागू करने की कोशिश करने पर वह सुरक्षाकर्मियों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते थे और आक्रामक व्यवहार करते थे।

इसके अलावा बिना किसी उचित कारण के कैदियों के साथ मारपीट करने के आरोप भी लगाए गए हैं।

गृह विभाग ने इन सभी आरोपों की विस्तृत विभागीय जांच शुरू कर दी है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो सुदर्शन प्रसाद सिंह के खिलाफ सेवा से बर्खास्तगी सहित कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

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