मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:33 · नई दिल्ली संस्करण

धागे से धरोहर तक : खादी महोत्सव में 3.20 करोड़ की रिकॉर्ड बिक्री, पिछले वर्ष से 42% की वृद्धि

राष्ट्रीय सागर डेस्क1 मिनट का पठन
धागे से धरोहर तक : खादी महोत्सव में 3.20 करोड़ की रिकॉर्ड बिक्री, पिछले वर्ष से 42% की वृद्धि

लखनऊ। गोमतीनगर स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित 10 दिवसीय खादी महोत्सव-2025 में इस बार बिक्री ने नया रिकॉर्ड बनाया। 'धागे से धरोहर तक' थीम पर हुए आयोजन में कुल कारोबार 3.20 करोड़ रुपए तक पहुंचा, जो पिछले वर्ष की 2.25 करोड़ रुपए की तुलना में लगभग 42 प्रतिशत अधिक है।

अंतिम दिन खरीदारी का दबाव सबसे अधिक रहा और देर शाम तक स्टॉलों पर भीड़ बनी रही।

खादी वस्त्र, हर्बल उत्पाद, जूट हस्तशिल्प और माटी कला इस बार ग्राहकों की पहली पसंद रहे।

महोत्सव में खादी संस्थाओं के 32, ग्रामोद्योग के 120 और माटी कला के 8 स्टॉल सहित कुल 160 उद्यमियों ने भाग लिया।

लखनऊ, मुजफ्फरनगर, बाराबंकी, गोरखपुर सहित विभिन्न जिलों से आए कारीगरों ने बताया कि इस वर्ष न केवल भीड़ बढ़ी, बल्कि खरीदारी को लेकर उत्साह भी पहले की तुलना में ज्यादा देखी गई।

स्वराज्य आश्रम के प्रेम कुमार, ग्राम सेवा संस्थान के सतेंद्र कुमार, मुजफ्फरनगर के अब्बास अंसारी, जूट आर्टिजन्स की अंजलि सिंह, बाराबंकी के प्रेमचंद्र और रॉयल हनी के प्रो. नितिन सिंह के अनुसार इस बार 'युवा ग्राहकों की उपस्थिति' विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, जिसने बिक्री को नया आयाम दिया।

पूरे आयोजन में युवाओं, छात्रों और महिलाओं की लगातार उपस्थिति रही।

आगंतुकों ने बताया कि एक ही जगह पर खादी, स्थानीय शिल्प और प्राकृतिक उत्पादों की इतनी व्यापक रेंज मिलना एक दिलचस्प और भरोसेमंद अनुभव रहा।

समापन अवसर पर बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी शिशिर ने उद्यमियों और आयोजन टीम को धन्यवाद देते हुए कहा कि खादी अब केवल परिधान का विकल्प नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर और आधुनिक उपभोक्ता दोनों की साझा पहचान बन चुकी है।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें