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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:47 · नई दिल्ली संस्करण

पांच बहनों ने तोड़ी सदियों की धारणा, पिता की अर्थी को कंधा देकर समाज को दिया बड़ा संदेश

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
पांच बहनों ने तोड़ी सदियों की धारणा, पिता की अर्थी को कंधा देकर समाज को दिया बड़ा संदेश

हाजीपुर । संपूर्ण विश्व को लोकतंत्र की राह दिखाने वाले बिहार के वैशाली से एक बार फिर समाज को बड़ा संदेश दिया गया। जिले के नया टोला गांव की पांच बहनों ने मिलकर ऐसा का किया जो मिसाल बन गया। समाज में अक्सर यह धारणा रही है कि पिता की अर्थी को बेटा ही कंधा देता है लेकिन, वैशाली थाना क्षेत्र के इस गांव में पांच बेटियों ने इस सोच को बदलते हुए अपने पिता को अंतिम विदाई देते हुए एक नई इबारत लिख दी।

आंखों में आंसू, कंधे पर पिता की अर्थी, मुंह में राम नाम सत्य है का मंत्र और दिल में धारणाओं से लोहा लेने वाली फौलादी ताकत। बिहार के वैशाली के एक गांव का यह नजारा जिसने भी देखा वह इन बेटियों के हौसले को सलाम करने से नहीं चूका। जानकारी के मुताबिक नया टोला निवासी 79 वर्षीय तारणि प्रसाद सिंह का निधन हो गया। उनके परिवार में पत्नी ललिता देवी (75) और पांच बेटियां हैं। बेटा नहीं होने के बावजूद परिवार ने किसी तरह की सामाजिक झिझक नहीं दिखाई। पिता के निधन के बाद उनकी पांचों बेटियां - पूनम सिंह (52), नीलम सिंह (50), माधुरी (42), माला (40) और चांदनी (35) खुद आगे आईं और पिता की अर्थी को कंधा दिया।

इस खास दृश्य को देखकर गांव में मौजूद लोग भी भावुक हो गए। पूरे इलाके में यह नजारा चर्चा का विषय बनी हुआ है। माधुरी सिंह ने कहा कि वे पांच बहनें हैं और कोई भाई नहीं है, इसलिए उन्होंने पिता को कंधा देने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि समाज में अक्सर लड़कों को अधिक महत्व दिया जाता है और लड़कियों को कमजोर समझा जाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि हर पुरुष को जन्म देने वाली एक महिला ही होती है। उन्होंने आगे कहा कि एक बेटी मां का रूप लेकर जीवन देती है, इसलिए वह अपने पिता को कंधा क्यों नहीं दे सकती। उनके पिता ने हमेशा उन्हें पढ़ाया-लिखाया और उनकी जिम्मेदारियों को निभाया, इसलिए आज उन्होंने भी अपना कर्तव्य निभाया है।

माधुरी ने यह भी कहा कि इस कदम का उद्देश्य समाज में फैले लड़का-लड़की के भेदभाव को खत्म करना है। उनका संदेश है कि लड़कियां किसी भी रूप में कमजोर नहीं हैं और अगर उन्हें अवसर मिले तो वे हर जिम्मेदारी निभा सकती हैं। सभी बहनें अब पूरे विधि-विधान और रिवाज से पिता के श्राद्ध कर्म में जुट गई हैं।

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