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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:20 · नई दिल्ली संस्करण

ओडिशा के जंगल में मिले पांच ओरंगुटान, तस्करी की आशंका से जांच तेज

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
ओडिशा के जंगल में मिले पांच ओरंगुटान, तस्करी की आशंका से जांच तेज

भुवनेश्वर। ओडिशा के बालेश्वर जिले के भोगराई ब्लॉक के एक जंगल से मंगलवार को पांच ओरंगुटान मिलने से उनकी तस्करी और इसमें किसी अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी रैकेट के शामिल होने का शक पैदा हो गया है।

पत्रकारों से बात करते हुए, ओडिशा के वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री गणेश राम सिंह खुंटिया ने कहा कि बालेश्वर जिले के भोगराई के जंगल में ओरंगुटान होने की जानकारी मिलने के बाद, वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और लगभग 1 से 2 साल के पांच ओरंगुटान बच्चों को बचाया।

उन्होंने आगे कहा कि ये वानर प्रजातियां इंडोनेशिया और मलेशिया के वर्षावनों (रेनफॉरेस्ट) की मूल निवासी हैं। इन्हें एशियाई उपमहाद्वीप के कुछ अन्य हिस्सों में भी देखा गया है। भारत में ये प्रजातियां बहुत कम पाई जाती हैं।

उन्होंने कहा, "ये प्रजातियां ओडिशा में नहीं पाई जाती हैं, लेकिन यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि राज्य में ऐसी अनोखी वन्यजीव प्रजातियां देखी गई हैं।

हो सकता है कि वे भोजन की तलाश में यहां आए हों, या इसमें कोई अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी रैकेट शामिल हो सकता है। जानकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक ओरंगुटान की कीमत लगभग 20 लाख से 25 लाख रुपए है।"

उन्होंने यह भी बताया कि वन विभाग की टीम इन अनोखे जानवरों को एक तय जगह पर लाएगी, जहां उन्हें क्वारंटाइन में रखा जाएगा और जरूरी इलाज दिया जाएगा। बाद में उन्हें भुवनेश्वर के नंदनकानन चिड़ियाघर में रखा जाएगा।

मंत्री ने कहा कि वन विभाग ने यह पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है कि ये अनोखी प्रजातियां ओडिशा कैसे पहुंचीं और क्या इसमें कोई अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी रैकेट शामिल है।

खबरों के अनुसार, वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) को भी इस बरामदगी के बारे में सूचित कर दिया गया है।

एजेंसी के भी इस मामले की जांच शुरू करने की संभावना है।

ओरंगुटान इंडोनेशिया और मलेशिया के मूल निवासी 'ग्रेट एप' (बड़े वानर) हैं, जो अपनी बुद्धिमत्ता और लाल-भूरे बालों के लिए जाने जाते हैं। वे गंभीर रूप से लुप्तप्राय हैं। उनके आवास के नुकसान और अवैध वन्यजीव व्यापार के कारण उनकी आबादी घट रही है।

भारत में ओरंगुटान की कोई मूल आबादी नहीं है। इसलिए, ओडिशा के एक जंगल में पांच ओरंगुटान के मिलने से अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी रैकेट के शामिल होने का संदेह पैदा हो गया है।

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