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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:34 · नई दिल्ली संस्करण

​बूंदी में साल की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन, आपसी समझौते से जुड़े टूटे परिवार

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
​बूंदी में साल की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन, आपसी समझौते से जुड़े टूटे परिवार

​बूंदी। राजस्थान के बूंदी जिले में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के देखरेख में शनिवार को वर्ष 2026 की प्रथम राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आगाज हुआ।

'त्वरित न्याय और आपसी भाईचारा' के मूल मंत्र के साथ आयोजित इस अदालत में जिलेभर में कुल 12 बेंचों का गठन किया गया, ताकि लंबित मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया जा सके।

​साल की पहली लोक अदालत के आयोजन को लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सरिता मीना और एससी/एसटी कोर्ट के न्यायिक अधिकारी डॉ. संजय कुमार गुप्ता ने बताया कि जिला मुख्यालय पर कुल पांच बेंच गठित की गई। सिविल कोर्ट के लगभग 6,500 मामले चिह्नित किए गए। ​रेवेन्यू कोर्ट (राजस्व) के 13000 से अधिक मामले रखे गए।

इसके अलावा पारिवारिक विवाद और चेक बाउंस जैसे अन्य महत्वपूर्ण मामलों पर भी काउंसलिंग की गई।

लोक अदालत का सबसे सुखद फैसला फैमिली कोर्ट से सामने आया, यहां पिछले 8 माह से चल रहे पति-पत्नी के विवाद में बेंच ने प्रभावी काउंसलिंग की। काउंसलिंग के बाद दोनों साथ रहने को राजी हो गए। इस राजीनामे से उनकी नन्ही बच्ची को पुनः अपने माता-पिता का प्यार और संरक्षण नसीब हुआ।

एक अन्य मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए 2010 के बैंक लोन का निपटारा किया गया। एक व्यक्ति द्वारा लिए गए 2 लाख 50 हजार रुपए के लोन को उनकी मृत्यु के बाद उनके बेटे ने मात्र 58,000 रुपए के सेटलमेंट पर चुकाया।

पिता के कर्ज के बोझ से दबे परिवार को इस लोक अदालत ने बड़ी राहत प्रदान की।

​राष्ट्रीय लोक अदालत ने एक बार फिर साबित किया कि विवादों का अंत केवल मुकदमों से नहीं बल्कि संवाद और समन्वय से भी संभव है। सचिव सरिता मीना ने आमजन से अपील की है कि वे अपने लंबित मामलों के निस्तारण के लिए लोक अदालत के मंच का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

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