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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:31 · नई दिल्ली संस्करण

एफआईआई की बिकवाली पर ब्रेक, बाजार में सुधार के संकेत; डीआईआई का समर्थन जारी

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
एफआईआई की बिकवाली पर ब्रेक, बाजार में सुधार के संकेत; डीआईआई का समर्थन जारी

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में लंबे समय से जारी बिकवाली के बाद अब विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के रुख में सुधार के शुरुआती संकेत दिखने लगे हैं।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस हफ्ते के आखिरी तीन कारोबारी सत्रों में एफआईआई नेट खरीदार बने, जिससे बाजार में रिकवरी को सपोर्ट मिला और निवेशकों का भरोसा भी बेहतर हुआ।

हालांकि, पूरे हफ्ते के हिसाब से देखें तो एफआईआई का कुल निवेश अब भी करीब 250 करोड़ रुपए नकारात्मक रहा। इसका मतलब है कि मजबूत और लगातार निवेश आने पर ही बाजार में स्थायी सुधार की पुष्टि होगी।

वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की बात करें तो इस दौरान उनका आउटफ्लो करीब 6,300 करोड़ रुपए रहा।

इसके बावजूद, विश्लेषकों का मानना है कि डीआईआई अब भी बाजार के लिए एक स्थिर सहारा बने हुए हैं और लंबी अवधि में बाजार को मजबूती देते रहेंगे।

इस हफ्ते रुपए में भी मजबूती देखने को मिली। भारतीय मुद्रा 93.24 के स्तर पर रही, जो करीब 0.15 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है। डॉलर इंडेक्स में कमजोरी और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीदों ने डॉलर की मांग घटाई, जिससे रुपए को सपोर्ट मिला।

एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी ने कहा कि बाजार का सकारात्मक माहौल एफआईआई के निवेश और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की उम्मीदों से भी मजबूत हुआ है, जिससे घरेलू बाजारों में पूंजी का प्रवाह बढ़ा है।

इसके अलावा, पिछले 48 घंटों में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने भी भारत के आयात बिल पर दबाव कम किया है, जिससे रुपए को और मजबूती मिली।

वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में तेज गिरावट तब आई जब ईरान ने घोषणा की कि युद्धविराम के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज व्यापारिक जहाजों के लिए पूरी तरह खुला है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम के बाद ईरान के विदेश मंत्री के बयान से तेल की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत तक गिरावट आई।

विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल रुपए को सपोर्ट मिल रहा है, लेकिन आगे इसकी मजबूती इस बात पर निर्भर करेगी कि भू-राजनीतिक हालात कैसे बदलते हैं और कच्चे तेल की कीमतें किस दिशा में जाती हैं।

विश्लेषकों के मुताबिक, आने वाले हफ्ते में बाजार का रुख खबरों पर ज्यादा निर्भर रहेगा, लेकिन माहौल फिलहाल सकारात्मक बना हुआ है। निवेशकों की नजर खास तौर पर अमेरिका-ईरान वार्ता के नतीजों पर रहेगी।

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