मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:20 · नई दिल्ली संस्करण

मानसून की दगाबाजी से बढ़ी किसानों की मुश्किलें, सिंचाई के लिए निजी बोरिंग का सहारा

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
मानसून की दगाबाजी से बढ़ी किसानों की मुश्किलें, सिंचाई के लिए निजी बोरिंग का सहारा

भागलपुर। जिले में इस वर्ष मानसूनी बारिश में भारी कमी देखी जा रही है, जिसने सीधे तौर पर खरीफ सीजन की खेती को संकट में डाल दिया है। जिले के अधिकांश क्षेत्रों में मानसून की सुस्ती के कारण धान की बुआई और रोपनी का काम पूरी तरह प्रभावित हुआ है।

आसमान में छिटपुट बादलों की आवाजाही के बीच किसान टकटकी लगाए बैठे हैं, लेकिन पर्याप्त बारिश न होने से अधिकतर खेत सूखे और खाली पड़े हैं। भागलपुर जिले के गोराडीह, जगदीशपुर, पिरपैंती और कहलगांव सहित अन्य प्रखंडों की कमोबेश यही स्थिति बनी हुई है। इन इलाकों के खेतों में जहाँ इस समय धान की हरी-भरी पौध और पानी लबालब होना चाहिए था, वहाँ आज खेत सूखे पड़े हैं। खेतों में नमी की कमी के कारण धान के बिचड़े भी सूखने की कगार पर पहुँच गए हैं।

इस भीषण जल संकट के बीच सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। वर्तमान में जिस किसान के पास निजी बोरिंग या पंपिंग सेट की सुविधा है, वे जैसे-तैसे पानी का इंतजाम कर धान की बुआई और रोपनी कर रहे हैं। हालांकि, बिजली की आंख-मिचौनी और महंगे डीजल के कारण कृत्रिम रूप से सिंचाई करना हर किसान के बस की बात नहीं रह गई है, जिससे खेती की लागत दोगुनी हो चुकी है।

खेती की इस बदहाली और सूखे की स्थिति पर जगदीशपुर के किसान राजकुमार पंजियारा ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि इस साल मानसून ने हमें पूरी तरह निराश किया है। हमारे पास सरकारी सिंचाई का कोई पुख्ता साधन नहीं है। जिनके पास निजी बोरिंग है, वे तो दिन-रात पैसे फूंककर किसी तरह खेत गीला कर रहे हैं, लेकिन हम जैसे छोटे किसान क्या करें? डीजल इतना महंगा है कि अगर पंप चलाकर जैसे-तैसे धान रोप भी दें, तो आगे फसल बचाने के लिए पानी कहाँ से लाएंगे?

बिना बारिश के खेती करना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। अगर जल्द ही अच्छी बारिश नहीं हुई, तो हमारी पूरी मेहनत और पूंजी डूब जाएगी और हमारे सामने भुखमरी की नौबत आ जाएगी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों के भीतर भागलपुर और इसके आस-पास के प्रखंडों में मूसलाधार बारिश नहीं होती है, तो धान के कुल उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।

समय पर रोपनी न होने से फसल की गुणवत्ता भी प्रभावित होगी। खेतों के खाली रह जाने और काम न मिलने के कारण ग्रामीण इलाकों से कृषक मजदूरों का पलायन भी तेजी से बढ़ सकता है। अब किसानों की एकमात्र उम्मीद केवल सरकार द्वारा मिलने वाले डीजल अनुदान, वैकल्पिक आकस्मिक फसल योजनाओं और इंद्र देव की दया पर टिकी हुई है।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें