मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:47 · नई दिल्ली संस्करण

बिहार में पूर्वी चंपारण जिले के किसान ने बोरियो में अदरख उगाकर दिखाई नई राह

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
बिहार में पूर्वी चंपारण जिले के किसान ने बोरियो में अदरख उगाकर  दिखाई नई राह

पूर्वी चंपारण। जिला में मोतिहारी प्रखंड के एक किसान ने सबको चौकने पर मजबूर कर दिया है। दरअसल इस किसान के पास खेत नहीं है, लेकिन वह हर साल खेती से लाखों की कमाई कर रहा है। किसान बसंत कुमार को यह कमाई अदरक की खेती से हो रही है। जिसे वे सीमेंट की 225 बोरियों में कर रहे है। किसान बसंत के अनुसार वह अपनी खेती जैविक तरीके से कर रहे है। प्रति बोरी से उन्हे दो किलो से अधिक की पैदावार मिल रही है। बाजार में अदरक की मांग के होने के कारण उन्हे अच्छी रेट मिल जाती है।अपने इस प्रयोग की सफलता पर प्रसन्नता जाहिर करते किसान वसंत बताते है,कि कुछ अच्छा करने के लिए महज संसाधन होना ही नही बल्कि जज्बा का होना भी जरूरी है।उन्होंने बताया कि एक दिन मै यूट्यूब पर वीडियो देख रहा था। इसी दौरान देखा कि एक किसान बोरियों में अदरक की खेती कर मोटी कमाई कर रहा है। लिहाजा उसने भी प्रयोग करने की ठान ली। बसंत कुमार के मुताबिक उसका क्षेत्र बाढ़ व जलजमाव प्रभावित है।ऐसे में वह कुछ समय तो इन बोरियों को घर के बाहर रखता है, लेकिन बरसात के दिनो में वह इन बोरियों को घर के छत पर रख देता है। जिससे इसे कोई नुकसान नही होता है। बसंत ने बताया कि घर के पास मौजूद थोड़ी सी जमीन पर वह केले के पौधे और गोबर से वर्मी कंपोस्ट तैयार करता है और अपनी खेती में इसी खाद का इस्तेमाल करता है।जिससे एक सीजन मे उसे करीब पांच कुंटल अदरक की पैदावार हो जाती है। जिसे वह 50 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचता है।अदरख की खेती मुख्यत: दो सीजन में होने के कारण हर साल उसे चार से पांच लाख रुपये की कमाई हो जाती है। बसंत ने बताया कि उसके पैदावार की खफत फिलहाल लोकल मार्केट में ही हो रहा है। अब औषधियां बनाने के लिए भी उनकी फसल की डिमांड आने लगी है। ऐसे में अब वह बोरियों की संख्या धीरे धीरे बढ़ाने लगा है।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें