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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:22 · नई दिल्ली संस्करण

फेक करेंसी रैकेट का भंडाफोड़: 2.38 करोड़ रुपए के नोट जब्त, 7 आरोपी गिरफ्तार

राष्ट्रीय सागर डेस्क4 मिनट का पठन
फेक करेंसी रैकेट का भंडाफोड़: 2.38 करोड़ रुपए के नोट जब्त, 7 आरोपी गिरफ्तार

अहमदाबाद। गुजरात की अहमदाबाद क्राइम ब्रांच को जाली नोट बनाने और उसे सर्कुलेट करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करने में बड़ी सफलता मिली है। इस मामले में अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने नकली भारतीय नोट बनाने और उसे सर्कुलेट करने में शामिल महिला समेत 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिससे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को होने वाले भारी नुकसान को रोक दिया गया है।

खुफिया जानकारी के आधार पर अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने एक सफेद फॉर्च्यूनर कार (जीजे-05-आरएस-5252) को जब्त किया, जो सूरत से अहमदाबाद के अमराईवाड़ी इलाके में 500 रुपए के जाली नोट को लेकर डिलीवरी के लिए जा रही थी। पुलिस ने कार को अमराईवाड़ी में टॉरेंट पावर के पास रोक लिया।

गाड़ी की तलाशी लेने पर उसके अंदर एक काला बैग और छिपी हुई पैकेजिंग से फेक करेंसी के बंडल बरामद हुए, जिसके बाद गाड़ी में सवार सभी लोगों को हिरासत में ले लिया गया है।

जांच के दौरान पता चला कि आरोपियों ने पिछले चार महीनों से सूरत में एक रिहायशी जगह पर नकली करेंसी छापने की साजिश रची हुई थी। इस गिरोह का नेतृत्व मुकेशभाई लखाभाई थुम्मर कर रहा था, जिसने प्रिंटर, पेपर कटिंग मशीन और अन्य सामान सहित जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर का इंतजाम किया था।

आरोपियों ने डिजिटल पेमेंट गेटवे का इस्तेमाल करके अलीबाबा जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की मदद से चीनी स्रोतों से आरबीआई और भारत के निशान वाले सिक्योरिटी थ्रेड पेपर हासिल किए थे।

इसके अलावा, जांच में यह भी खुलासा हुआ कि नकली नोटों के डिजाइन, लेआउट और दिखने की विशेषताओं को असली भारतीय करेंसी जैसा बनाने के लिए फोटो-एडिटिंग सॉफ्टवेयर और चैटजीपीटी जैसे एआई-आधारित प्लेटफॉर्म सहित डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल किया गया था।

आरोपियों में से एक को ग्राफिक एडिटिंग और प्रिंटिंग प्रक्रियाओं में महारत हासिल थी, जिसका इस्तेमाल करके वह नकली नोटों की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए करता था।

क्राइम ब्रांच ने मिली गुप्त सूचना के आधार पर एक टीम को तुरंत सूरत भेजा और सूरत क्राइम ब्रांच के साथ तालमेल बिठाकर, नकली करेंसी बनाने वाली जगह को सुरक्षित कर लिया। नकली करेंसी सूरत में 'श्री सत्य योग फाउंडेशन' के आश्रम में छापी जा रही थी। यह आश्रम सूरत जिले की कामरेज तालुका के धोरन पारडी गांव में बना हुआ है।

क्राइम ब्रांच पुलिस ने आश्रम के गुरु, परम पूज्य अष्टांग योग सिद्ध सद्गुरु प्रदीप को भी गिरफ्तार कर लिया है, जहां आश्रम की आड़ में नकली करेंसी छापी जा रही थी।

अहमदाबाद क्राइम ब्रांच पुलिस ने 'श्री सत्य योग फाउंडेशन' पर छापा मारा और कई दस्तावेज जब्त किए। इस दौरान नकली करेंसी नोट छापने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी जब्त कर लिए गए। क्राइम ब्रांच द्वारा अहमदाबाद में गिरोह की कार से लगभग 2.10 करोड़ रुपए मूल्य के नकली 500 रुपए के नोट (42,000 नोट), फॉर्च्यूनर गाड़ी, जिसकी किमत लगभग 25 लाख रुपए है, मोबाइल फोन और नकद राशि, जिनका मूल्य लगभग 1.20 लाख रुपए है, बरामद किए गए हैं। वहीं, गिरोह के सूरत के ठिकाने से लगभग 28 लाख रुपए मूल्य के नकली 500 रुपए के नोट, सिक्योरिटी थ्रेड पेपर (16 रीम), प्रिंटर, लैपटॉप, पेपर कटिंग मशीन, नोट गिनने की मशीन और अन्य उपकरण बरामद किए गए हैं।

सभी आरोपी सूरत के रहने वाले हैं, जिनकी पहचान मुकेशभाई लखाभाई - थुम्मर, अशोकभाई धनजीभाई - मावानी, रमेशभाई वल्लभभाई - भालर, दिव्येश ईश्वरभाई - राणा, प्रदीपभाई दिलीपभाई- जोतांगिया, महिला आरोपी- कतारगाम और भरतभाई वलजीभाई - काकड़िया के रूप में हुई है। सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और डीसीबी पुलिस स्टेशन में एक मामला दर्ज किया गया है। वहीं, पुलिस द्वारा व्यापक नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन के सुराग और संभावित अंतर-राज्यीय या अंतरराष्ट्रीय संबंधों का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है।

इस ऑपरेशन का देश की वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा पर अत्यंत महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। उच्च गुणवत्ता वाली नकली मुद्रा का प्रचलन सीधे तौर पर वैध मुद्रा में जनता के विश्वास को कमजोर करता है, मौद्रिक स्थिरता को बाधित करता है, और इसका उपयोग संगठित अपराध तथा अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए किया जा सकता है।

इतनी बड़ी मात्रा में नकली मुद्रा की जब्ती, और साथ ही एक संगठित छपाई इकाई का भंडाफोड़, उस आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावी ढंग से निष्क्रिय कर देता है, जो बाजार में भारी मात्रा में नकली मुद्रा डाल सकती थी।

वितरण के चरण को रोककर और निर्माण के स्रोत की पहचान करके, क्राइम ब्रांच ने न केवल तत्काल आर्थिक नुकसान को रोका है, बल्कि एक ऐसे बड़े नेटवर्क पर भी अंकुश लगाया है, जो अपने ऑपरेशन्स का आगे और विस्तार कर सकता था। यह मामला अपराध करने के बदलते तरीकों को उजागर करता है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय खरीद चैनलों और डिजिटल उपकरणों का उपयोग शामिल है। यह कानून प्रवर्तन एजेंसियों में निरंतर सतर्कता और तकनीकी अनुकूलन की आवश्यकता को और मजबूत करता है।

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