तिरुवनंतपुरम में 33 दिन से खड़ा F-35B अब उड़ने को तैयार, लेकिन भारत बोले – पहले खुद तो उड़ लो!"

"जो खुद उड़ न सका, वो हमें उड़ाएगा?"
तिरुवनंतपुरम में 33 दिन से खड़ा F-35B अब उड़ने को तैयार, लेकिन भारत बोले – पहले खुद तो उड़ लो!" F-35B stranded in Thiruvananthapuram for 33 days is now ready to fly but India says Try flying yourself first
राष्ट्रीय सागर हास्य - व्यंग वाली रिपोर्ट | 17 जुलाई 2025 | तिरुवनंतपुरम/नई दिल्ली
“अमेरिका का सबसे घमंडी लड़ाकू विमान आखिरकार टेक-ऑफ की हालत में है, लेकिन भारत और भारतीय बोले भाई, 33 दिन से तुम तो यहीं बैठे हो, अब हमें कौन भरोसा दिलाएगा?”
तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पिछले 1 महीने से जमीन पर ‘ठंडी सांसें’ ले रहा ब्रिटिश F‑35B लड़ाकू विमान अब उड़ान भरने को तैयार है। लेकिन इस ‘उड़ने को बेताब’ विमान की हालत देखकर भारत शायद अब ये सोच रहा है कि – "हमें तो लगा था ये फाइटर है, निकला बैठने वाला स्कूटर!"
कहानी थोड़ी फिल्मी है पर पूरी सच्ची:
14 जून को खराब मौसम और ईंधन की कमी के कारण ये 'अमेरिकी जिगर वाला' फाइटर जेट तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर धड़ाम से इमरजेंसी लैंड कर गया। विमान तो ब्रिटिश रॉयल नेवी का है, पर बना है अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन द्वारा वही कंपनी जो भारत को यही विमान बेचने के सपने देख रही थी।
पर सपना टूट गया जब विमान उठ न सका!
33 दिनों तक हाइड्रोलिक गड़बड़ी और तकनीकी झंझटों में उलझे इस ‘उल्कापिंड’ की मरम्मत में ब्रिटेन से इंजीनियरों की फौज आई, स्कैन हुआ, पुर्जे बदले गए, पूजा-अर्चना भी हुई (कहते हैं किसी ने नारियल भी फोड़ा) और अब कहीं जाकर साहब ‘उड़ने’ की स्थिति में आए हैं।
अब सवाल उठता है – क्या भारत लेगा ये विमान?
अमेरिका लंबे समय से भारत को F‑35 बेचने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अब देश का मूड बदला-बदला सा है।
एक वरिष्ठ रक्षा विश्लेषक/ व्यंगकार ने चुटकी लेते हुए कहा –
“अगर जेट 33 दिन तक एक ही जगह पड़ा रहे, तो पाकिस्तान भी उसे देखकर कहेगा चलो चाय पीते हैं, कोई खतरा नहीं!”
इस घटना ने भारत की जनता और रक्षा विभाग दोनों को सोच में डाल दिया है – क्या इतना महंगा विमान ($115 मिलियन यानी ₹960 करोड़) वाकई भरोसेमंद है?
या फिर यह ‘टेक्नोलॉजी का ट्रेलर’ है और ‘विश्वास का थ्रिलर’?
लेकिन ठहरिए, बात यहीं खत्म नहीं होती…
ये घटना भारत-ब्रिटेन तकनीकी सहयोग के लिहाज से तो मिसाल बन गई – ब्रिटेन ने अपना विमान भारत में उतारा, भारत ने उसे सुरक्षित रखा, चाय-नाश्ता कराया, और इंजीनियरिंग सपोर्ट भी दिया।
लेकिन इस सबसे बड़ा सबक शायद अमेरिका जैसे व्यापारिक मुल्क को मिला:
“सिर्फ स्टील्थ और स्टाइल से कोई विमान नहीं बिकता साहब, जमीन पर खड़े हो जाएं तो भरोसे की उड़ान भी थम जाती है।”
तो अगली बार जब कोई डील की बात हो, तो भारत शायद यही कहे – “भाई साहब, हमें अपना तेजस फ्रांस वालों का Rafale और हमरे रूस वालों का सुखोई और मिराज ही ठीक लग रहा है. कम से कम उड़े तो!”
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जुड़े रहिए, मुस्कराइए और सोचिए क्या मोदी सरकार करोडो या अरबों रुपैया में एक खड़ा हुआ फाइटर खरीदना चाहेंगे? 😉





