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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:49 · नई दिल्ली संस्करण

किशनगंज में एक्सप्रेसवे परियोजना आगे बढ़ी, 51 मौजा की जमीन का होगा अधिग्रहण

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
किशनगंज में एक्सप्रेसवे परियोजना आगे बढ़ी, 51 मौजा की जमीन का होगा अधिग्रहण

किशनगंज। जिले में बहुप्रतीक्षित गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा भू-अर्जन विभाग को अधियाचना सौंपे जाने के बाद जिला प्रशासन ने आवश्यक तैयारियां तेज कर दी हैं। इस परियोजना को सीमांचल क्षेत्र के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

प्रस्तावित एक्सप्रेसवे किशनगंज जिले के ठाकुरगंज, बहादुरगंज और टेढ़ागाछ प्रखंडों से होकर गुजरेगा। परियोजना के लिए जिले के कुल 51 मौजा की भूमि अधिग्रहित की जाएगी। इनमें ठाकुरगंज प्रखंड के 22, बहादुरगंज के 23 तथा टेढ़ागाछ के छह मौजा शामिल हैं। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है। करीब 519 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का निर्माण लगभग 32 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से किया जाएगा।

केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से शुरू होकर बिहार के पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज होते हुए पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक जाएगा।परियोजना के पूरा होने से सीमांचल क्षेत्र में व्यापार, उद्योग, कृषि विपणन और पर्यटन को नई गति मिलने की संभावना है। नेपाल, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों के साथ बेहतर सड़क संपर्क स्थापित होने से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

साथ ही सामरिक दृष्टि से भी यह एक्सप्रेसवे महत्वपूर्ण साबित होगा।

वर्तमान में गोरखपुर से सिलीगुड़ी तक की यात्रा में 14 से 15 घंटे का समय लगता है। एक्सप्रेसवे बनने के बाद यह दूरी महज 6 से 8 घंटे में पूरी की जा सकेगी। इससे माल परिवहन तेज होगा, यात्रियों के समय की बचत होगी तथा निर्माण कार्य के दौरान और उसके बाद स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होने की उम्मीद है।

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