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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:50 · नई दिल्ली संस्करण

एक्सरसाइज हरिमाऊ शक्ति : भारत-मलेशिया का आतंकवाद-रोधी अभ्यास

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
एक्सरसाइज हरिमाऊ शक्ति : भारत-मलेशिया का आतंकवाद-रोधी अभ्यास

नई दिल्ली। भारत और मलेशिया की सेनाओं ने संयुक्त सैन्य अभ्यास हरिमाऊ शक्ति 2025 के तहत उन्नत सामरिक युद्धाभ्यास पूरा किया है। इस महत्वपूर्ण सैन्य अभ्यास में हेलीबोर्न इन्सर्शन तकनीक और वास्तविक युद्ध परिस्थितियों के अनुरूप अभ्यास किए गए।

अभ्यास का उद्देश्य भारतीय सेना व मलेशियाई सशस्त्र बलों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी, ऑपरेशनल समन्वय और संयुक्त युद्ध क्षमता को और सुदृढ़ करना था।

भारतीय सेना और मलेशियाई सेना के बीच आयोजित यह संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘हरिमाऊ शक्ति 2025’ का पांचवां संस्करण था, जो शुक्रवार को संपन्न हो गया।

दो सप्ताह चले इस अभ्यास के समापन समारोह का आयोजन राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में किया गया। अभ्यास में संयुक्त अभियान क्षमता पर विशेष फोकस रहा। इस संस्करण में दोनों सेनाओं ने संयुक्त सामरिक अभ्यास किया। सेना के मुताबिक अभ्यास के दौरान दोनों देशों के जवानों ने काउंटर-इंसर्जेंसी और काउंटर-टेररिज्म से जुड़े आधुनिक सिद्धांतों को साझा किया।

अभ्यास के दौरान भारत और मलेशिया के सैनिकों ने संयुक्त पेट्रोलिंग रिहर्सल की। साथ ही, बदलती परिस्थितियों में त्वरित निर्णय-क्षमता और ऑपरेशनल एकजुटता को बेहतर बनाने पर भी विशेष चर्चा की गई। छोटे दस्तों की आक्रामक क्षमता बढ़ाने के लिए घात सिद्धांतों पर सत्र आयोजित किए गए।

सैन्य अभ्यासों में दोनों सेनाओं के जवान जटिल इलाकों में चलते हुए हेलीकॉप्टर से रस्सी के सहारे नीचे उतरे और दुश्मन पर काबू पाया। हेलीकॉप्टर से जुड़े इस युद्धाभ्यास में घने और सीमित भू-भाग में संचालन के लिए आवश्यक हेलीबोर्न इन्सर्शन तकनीकों का प्रदर्शन किया गया।

घात लगाने का अभ्यास, हेलीकॉप्टर स्लिदरिंग प्रदर्शन, लाइव फायरिंग, और सुचारु संयुक्त पैट्रोलिंग जैसे प्रगतिशील मॉड्यूल्स यहां आयोजित किए गए।

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक यह अभ्यास न केवल भारत-मलेशिया रक्षा सहयोग की बढ़ती मजबूती का प्रतीक रहा, बल्कि दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास, सहयोग और रणनीतिक साझेदारी का भी सशक्त प्रमाण है। आतंकवाद-रोधी अभियानों से संयुक्त क्षमता में वृद्धि हुई है।

अभ्यास के दौरान भारतीय और मलेशियाई सैनिकों ने अर्ध-शहरी और शहरी इलाकों में आतंकवाद-रोधी कार्रवाई की संयुक्त रणनीतियों का अभ्यास किया। यह अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं की क्षमता, प्रतिक्रिया कौशल और समन्वय को बढ़ाने के साथ-साथ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और रक्षा सहयोग के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जा रहा है।

अभ्यास के दौरान दोनों सेनाओं ने यह संदेश दिया कि क्षेत्रीय सुरक्षा के बदलते स्वरूप में भारत और मलेशिया मिलकर भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं।

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