मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:11 · नई दिल्ली संस्करण

आपातकाल भारत के इतिहास में काला अध्याय : कर्नल राज्यवर्धन राठौड़

राष्ट्रीय सागर डेस्क1 मिनट का पठन

जयपुर,। केबिनेट मंत्री और झोटवाड़ा से भाजपा विधायक कर्नल

राज्यवर्धन राठौड़ ने मंगलवार को कहा कि भारत के लोकतंत्र का अपमान करते हुए

कांग्रेस पार्टी द्वारा 25 जून 1975 को लागू किए गए आपातकाल के विरोध में

खड़े होने वाले लोकतंत्र के प्रहरी समस्त राष्ट्रभक्तों को कोटि-कोटि नमन।

संविधान को बचाने की लड़ाई में आप सभी द्वारा दिया गया योगदान सदैव

अविस्मरणीय रहेगा।

कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि निरंकुश

कांग्रेस सरकार ने एक परिवार के सत्ता सुख के लिए 21 महीनों तक देश में सभी

प्रकार के नागरिक अधिकार निलंबित कर दिए थे। इस दौरान उन्होंने मीडिया पर

सेंसरशिप लगा दी थी, संविधान में बदलाव किए और न्यायालय तक के हाथ बांध दिए

थे। 25 जून 1975 को रात के अंधेरे में कांग्रेस की सरकार ने भारत के

लोकतंत्र को नष्ट करने का प्रयास किया था।

कर्नल राज्यवर्धन राठौड़

ने कहा, डार्क डेज ऑफ़ इमरजेंसी हमें याद दिलाती है कि कैसे कांग्रेस पार्टी

ने बुनियादी स्वतंत्रता को नष्ट कर दिया और भारत के संविधान को कुचल दिया,

जिसका हर भारतीय सम्मान करता है। देश में लोकतंत्र की हत्या और उस पर

बार-बार आघात करने का कांग्रेस का लंबा इतिहास रहा है। 25 जून, 1975 को

कांग्रेस के द्वारा लगाया गया आपातकाल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। कांग्रेस

की आपातकाल वाली मानसिकता आज भी नहीं गई है। आपातकाल के बंदी आज भी यातनाएं

नहीं भूले हैं और ना कभी भूल पाएंगे। आपातकाल, एक ऐसा कालखंड जिसने केवल

देश ही नहीं बल्कि इसके प्रत्येक नागरिक के सपनों को कुचल दिया था।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें