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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:26 · नई दिल्ली संस्करण

चिराग पासवान, ललन सिंह समेत बिहार के 8 सांसदों ने ली मंत्रीपद की शपथ

राष्ट्रीय सागर डेस्क9 मिनट का पठन
चिराग पासवान, ललन सिंह समेत बिहार के 8 सांसदों ने ली मंत्रीपद की शपथ

चिराग पासवान, ललन सिंह समेत बिहार के 8 सांसदों ने ली मंत्रीपद की शपथ

नई दिल्ली/पटना ।नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद बिहार के 8 सांसदों ने मंत्री पद की शपथ ली। इसमें जीतन राम मांझी, गिरिराज सिंह, ललन सिंह और चिराग पासवान ने केंद्रीय मंत्री के रूप में शपथ ली।वहीं, नित्यानंद राय, रामनाथ ठाकुर, सतीशचंद्र दुबे और राज भूषण चौधरी ने राज्य मंत्री के पद की शपथ ली। बिहार से सबसे पहले हम सुप्रीमो जीतन राम मांझी ने मंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद बाकी सभी सांसदों ने शपथ ली।मोदी 3.0 में गिरिराज सिंह और नित्यानंद राय को रिपीट किया गया है। वहीं, 6 चेहरे राजभूषण चौधरी, सतीश चंद्र दुबे, जीतन राम मांझी, ललन सिंह, चिराग पासवान और रामनाथ ठाकुर को पहली बार जगह दी गई है।मोदी 3.0 में बिहार से सबसे ज्यादा 8 सांसदों को जगह मिली है। इसमें दो भूमिहार, दो दलित, एक यादव, एक ईबीसी, एक ब्राह्मण और एक मल्लाह जाति से हैं। मोदी सरकार में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब किसी राजपूत जाति के सांसद को मंत्रालय में जगह नहीं दी गई है।

-गिरिराज सिंह बने मंत्री, बेगूसराय सीट से लगातार दूसरी बार दर्ज की जीत

लखीसराय के बड़हिया के मूल निवासी गिरिराज सिंह लगातार तीसरी बार केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री बने हैं। 72 वर्षीय गिरिराज सिंह के पास मगध विवि से स्नातक की डिग्री है वे 2002 से 2014 तक लगातार बिहार विधान परिषद के सदस्य रहे। इस दौरान उन्होंने बिहार सरकार में पशुपालन एवं मत्स्य संसाधन, सहकारिता सहित कई अन्य विभाग संभाले। मई 2014 में पहली बार नवादा संसदीय क्षेत्र से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। पहली बार में ही उनको केंद्र सरकार में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के राज्यमंत्री की जिम्मेदारी मिली। मई 2019 में वे दूसरी बार बेगूसराय संसदीय क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुने गये। जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार को हराने की वजह से चर्चित रहे. इस बार उनको मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी के साथ ही ग्रामीण विकास विभाग और पंचायती राज मंत्रालय के कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी दी गयी। गिरिराज 2024 में तीसरी बार बेगूसराय से ही लोकसभा के लिए चुन कर आये हैं। इस बार उन्होने सीपीआइ के अबधेश कुमार राय को हराया है।

-नरेंद्र मोदी के ‘हनुमान’ चिराग पासवान को कैबिनेट में मिली जगह

बिहार के हाजीपुर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल करने वाले लोजपा (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने केंद्रीय मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ ले ली है। चिराग पहली बार केंद्र में मंत्री बने हैं। हाजीपुर से चुनाव जीतने वाले चिराग पासवान को कुल 6,15,718 वोट मिले थे। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी राजद के शिवचन्द्र राम को 1.70 लाख से अधिक वोटों से हराया।चिराग पासवान बिहार की राजनीति में एक प्रमुख युवा चेहरा हैं वे लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष और बिहार के प्रसिद्ध दलित नेता स्वर्गीय रामविलास पासवान और रीना शर्मा के बेटे हैं। चिराग का जन्म 31 अक्टूबर 1982 को दिल्ली में हुआ था। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 2014 में की थी, जब वे बिहार के जमुई से पहली बार सांसद चुने गए थे चिराग ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। पढ़ाई के बाद राजनीति में आने से पहले वे बॉलीवुड में भी अपनी किस्मत आजमा चुके हैं।

-जदयू के ललन सिंह बने मंत्री

जदयू नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह भी मंत्री बनाए गए हैं। रविवार को राष्ट्रपति भवन में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया। मुंगेर के सांसद सह जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने मंत्री पद की शपथ ली है। ललन सिंह मुंगेर से लगातार दूसरी बार सांसद चुनकर आए हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024 में राजद प्रत्याशी कुमारी अनिता को सीधी टक्कर में मात दी है। ललन सिंह जदयू के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष सह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाते हैं। लोकसभा चुनाव 2014 में जब भाजपा और जदयू अलग होकर मैदान में उतरी थी तब ललन सिंह की हार मुंगेर सीट से हुई थी। जिसके बाद उन्हें बिहार विधान परिषद के सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया था। ललन सिंह बेगूसराय के भी सांसद रह चुके हैं।

-जीतन राम मांझी 79 की उम्र में पहली बार पहुंचे लोकसभा, मंत्रिमंडल में हुए शामिल

बिहार के गया लोकसभा क्षेत्र से जीत हासिल करने वाले हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के जीतन राम मांझी ने देश के संविधान के मुताबिक मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ ले ली है। केंद्रीय मंत्री बनने से पहले जीतन राम मांझी बिहार के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। गया निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीतने वाले जीतन राम मांझी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी राजद के कुमार सर्वजित को 1,01,812 वोटों से पराजित किया है। बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी का जन्म 6 अक्टूबर 1944 को गया जिले के खिजरसराय के महकार गांव में रामजीत राम मांझी और सुकरी देवी के घर हुआ था। उनके माता-पिता मुसहर जाति के खेतिहर मजदूर थे। जीतन राम मांझी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही एक शिक्षक से प्राप्त की. फिर उन्होंने मगध विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद मांझी ने 13 साल तक गया के टेलीफोन एक्सचेंज में भी काम किया।2014 में लोकसभा चुनाव में जनता दल (यूनाइटेड) के खराब प्रदर्शन के बाद नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद उन्होंने जीतन राम मांझी को बिहार का मुख्यमंत्री नियुक्त किया। मांझी का कार्यकाल विवादों से भरा रहा वो 20 मई 2014 से 20 फरवरी 2015 तक ही मुख्यमंत्री रहे, लेकिन उन्होंने अपने कार्यकाल में कई अहम फैसले भी लिए, जिनका उद्देश्य समाज के गरीब और पिछड़े तबके को लाभ पहुंचाना था।

-नित्यानंद राय ने ली राज्यमंत्री पद की शपथ, पंचायती स्तर से शुरू की थी राजनीति

बिहार के उजियारपुर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीतने वाले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और सांसद नित्यानंद राय ने केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में शपथ ले ली है। नित्यानंद राय इससे पहले केंद्रीय गृह राज्य मंत्री भी रह चुके हैं। उजियारपुर से चुनाव जीतने वाले नित्यानंद राय को कुल 5,14,978 वोट मिले। उन्होंने राजद के आलोक मेहता को 60,503 वोटों से हराया। नित्यानंद राय का जन्म 1 जनवरी 1966 को हाजीपुर से कुछ दूर कर्णपुरा गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। उनकी मां गृहिणी थीं और पिता गंगा विष्णु राय 20 साल तक ग्राम पंचायत कर्णपुरा के मुखिया रहे उन्होंने आर.एन. डिग्री कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की है। छात्र जीवन से ही राजनीति में रुचि रखने वाले नित्यानंद राय 1982 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्य बन गए।छात्र जीवन से राजनीति में सक्रिय नित्यानंद राय एबीवीपी के जिला प्रमुख और विभाग प्रमुख रहे। वो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की शाखा से भी जुड़े. जहां उन्होंने तहसील कार्यवाहक की जिम्मेदारी भी निभाई. नित्यानंद राय 1990 में बीजेपी में शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने पंचायत स्तर पर काम किया और फिर प्रदेश मंत्री और प्रदेश महामंत्री जैसे पदों पर भी रहे। 1998 में नित्यानंद राय भारतीय जनता युवा मोर्चा (बीजेवाईएम) के अध्यक्ष बने। वर्ष 2000 में उन्होंने हाजीपुर से बिहार विधानसभा का चुनाव जीता. यहां से उन्होंने चार बार चुनाव जीता।

-जदयू के रामनाथ ठाकुर बने केंद्र में मंत्री

रामनाथ ठाकुर जदयू के प्रमुख नेताओं में एक हैं उनके पिता कर्पूरी ठाकुर बिहार के चर्चित मुख्यमंत्री रह चुके हैं। कर्पूरी ठाकुर अपने फैसले, आरक्षण और सादगी भरी राजनीति के लिए याद किए जाते हैं। हाल में ही कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया था उनके भारत रत्न अवार्ड को रामनाथ ठाकुर के हाथों में ही सौंपा गया था। रामनाथ ठाकुर वर्तमान में जदयू की ओर से राज्यसभा के सांसद हैं और नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले रामनाथ ठाकुर को अब केंद्र सरकार में मंत्री बनाया है। रामनाथ ठाकुर नाई जाति से ताल्लुकात रखते हैं।रामनाथ ठाकुर का जन्म 3 मार्च 1950 को समस्तीपुर के कर्पूरी ग्राम में हुआ। जदयू की तरफ से वो राज्यसभा का प्रतिनिधित्व करते हैं। रामनाथ ठाकुर को लंबा सियासी अनुभव है और वो बिहार सरकार में मंत्री पद की कमान थाम चुके हैं। अलग-अलग सरकार में रामनाथ ठाकुर मंत्री बने हैं। राज्यसभा से पहले रामनाथ ठाकुर बिहार विधान परिषद के सदस्य थे। लालू यादव की कैबिनेट में उन्होंने गन्ना उद्योग विभाग की कमान मंत्री बनकर थामी थी। वहीं नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में 2005 में बनी सरकार में वो राजस्व और भूमि सुधार समेत अन्य कुछ विभागों के मंत्री रहे हैं. रामनाथ ठाकुर अब केंद्र में मंत्री बनाए गए हैं।

-जेल से शुरू की थी राजनीति, अब पहली बार बने केंद्रीय मंत्री

बिहार से राज्यसभा सांसद सतीश चंद्र दुबे को मोदी मंत्रिमंडल में जगह मिली है। मोदी कैबिनेट 3.0 में उन्होंने राज्य मंत्री के तौर पर शपथ लिया है। साल 2019 में सतीश चंद्र दुबे को राज्यसभा सांसद बनाया गया था।राज्य मंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद सतीश चंद्र दुबे के गांव हरसरी समेत समेत पूरे जिले में खुशी का माहौल है। हरसरी में लोग एकदूसरे को मिठाई खिलाकर और पटाखा फोड़कर खुशी जाहिर कर रहे हैं।बड़े भाई प्रदीप दुबे ने कहा कि उनको देश की सेवा करने का मौका मिला है। मैं चाहूंगा कि ईमानदारी के साथ वो अपना काम करें। साल 2000 से शिवसेना से राजनीति में आए और आज तक सफल रहे हैं। आगे भी जरूर रहेंगे। बता दें कि सतीश चंद्र दुबे ने साल 2000 में बेतिया जेल से राजनीति की शुरुआत की थी। शिवसेना के टिकट पर पहली बार चुनाव लड़े, लेकिन हार गए थे। फिर भाजपा में शामिल हुए और लोकसभा सांसद भी रहे।

-मोदी कैबिनेट में डॉ. राज भूषण चौधरी भी

बोचहां उपचुनाव के दौरान ही अजय निषाद ने ही राजभूषण चौधरी को भाजपा में शामिल करवाया। पार्टी में उन्हें अच्छा पद भी मिला। लोकसभा चुनाव से पहले अचानक भाजपा ने अजय निषाद का टिकट काट दिया और राजभूषण निषाद को दे दिया। मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी छोड़कर भाजापा के टिकट पर पहली बार मुजफ्फरपुर से सांसद बने राजभूषण चौधरी भी टीम मोदी में शामिल हो गए हैं। उन्होंने राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में शपथ ली।

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