बिहार में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का प्रभावी क्रियान्वयन: समावेशन की ओर एक ठोस कदम

बिहार में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का प्रभावी क्रियान्वयन: समावेशन की ओर एक ठोस कदम
नई दिल्ली / पटना, 4 जुलाई 2025 : बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) प्रक्रिया इस समय राज्य निर्वाचन व्यवस्था की नींव को मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर है। यह प्रक्रिया न केवल मतदाता सूची के अद्यतन की एक प्रशासनिक कवायद है, बल्कि यह लोकतंत्र की समावेशी भावना को जीवंत करती है। 1.5 करोड़ घरों में बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) का पहला दौरा पूरा हो चुका है और अब तक 87 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं को गणना प्रपत्र वितरित किए जा चुके हैं, जो इस प्रक्रिया की गति और गंभीरता को दर्शाता है।
भौगोलिक विविधता के बीच व्यापक पहुँच
24 जून 2025 तक राज्य में पंजीकृत 7.89 करोड़ मतदाताओं में से 6.86 करोड़ से अधिक को बीएलओ द्वारा गणना फॉर्म वितरित किया जा चुका है। शेष घरों तक पहुंच न बना पाने के पीछे कारण जैसे—बंद घर, प्रवास, मृत्यु या अस्थायी अनुपस्थिति—स्वाभाविक हैं। लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि बीएलओ तीन बार प्रत्येक घर का दौरा करेंगे, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी पात्र नागरिक सूची से वंचित न रह जाए। यह सक्रिय और सघन निगरानी प्रणाली बिहार जैसे जनघनत्व वाले राज्य के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बन रही है।
तकनीक के साथ पारदर्शिता का समन्वय
ईसीआई का पोर्टल https://voters.eci.gov.in और ECINET ऐप इस प्रक्रिया में तकनीकी समावेशन का मजबूत उदाहरण है। आंशिक रूप से भरे गए फॉर्म पोर्टल पर उपलब्ध हैं, जिन्हें मतदाता स्वयं डाउनलोड और भरकर अपलोड कर सकते हैं। इससे प्रक्रिया पारदर्शी होने के साथ-साथ स्वतंत्र और सुलभ भी हो गई है।
राजनीतिक भागीदारी और सक्रिय भूमिका
एसआईआर प्रक्रिया की एक और महत्वपूर्ण विशेषता विभिन्न राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी है। 2 जुलाई तक 1,54,977 बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) नामांकित किए जा चुके हैं, जिनमें भाजपा (52,689), राजद (47,504), जदयू (34,669), कांग्रेस (16,500) सहित अन्य दल शामिल हैं। यह दर्शाता है कि मतदाता सूची की पवित्रता केवल सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक उत्तरदायित्व भी है। प्रत्येक बीएलए प्रतिदिन 50 प्रमाणित फॉर्म जमा कर सकता है, जो क्षेत्रीय निगरानी और सटीकता को और बेहतर करता है।
समयबद्धता और जवाबदेही का अनुपालन
अब तक लगभग 38 लाख भरे गए हस्ताक्षरित फॉर्म बीएलओ को प्राप्त हो चुके हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट मतदाता सूची 1 अगस्त 2025 को प्रकाशित की जाएगी। इसके लिए 25 जुलाई 2025 अंतिम तिथि है, जब तक प्रत्येक पात्र मतदाता को हस्ताक्षरित गणना फॉर्म आयोग को देना अनिवार्य होगा। इसके पश्चात 2 अगस्त से दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया शुरू होगी और 30 सितंबर 2025 को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।
आशंकाओं के बावजूद समावेशन प्राथमिकता में
कुछ स्तरों पर एसआईआर प्रक्रिया को लेकर शंकाएं उठी हैं विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और प्रवासी मतदाताओं को लेकर। लेकिन यह ध्यान रखना आवश्यक है कि आयोग की मंशा “समावेशन सर्वप्रथम” की है। बीएलओ को निर्देश दिए गए हैं कि वे दस्तावेजों के साथ प्रत्येक प्रविष्टि का ईमानदारीपूर्वक सत्यापन करें और कोई भी पात्र व्यक्ति सूची से बाहर न हो। यह लोकतंत्र में सहभागिता का मूल स्तंभ है।
लोकतंत्र की जड़ें मज़बूत कर रही है SIR प्रक्रिया
बिहार में मतदाता सूची का यह विशेष गहन पुनरीक्षण एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक औपचारिकता है. यह लोकतंत्र की नींव को सशक्त करने का माध्यम है। जब हर नागरिक का नाम, पहचान और मत का अधिकार सुनिश्चित होगा, तभी चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष और भरोसेमंद बन सकेगी।
आवश्यक है कि मतदाता, राजनीतिक दल, प्रशासन और सिविल सोसाइटी सभी इस महायज्ञ में अपनी भूमिका को ईमानदारी से निभाएं। यही एक सशक्त और भागीदारीपूर्ण लोकतंत्र का मार्ग प्रशस्त करेगा।





