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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:47 · नई दिल्ली संस्करण

ईडी ने अशोक खरात समेत 6 आरोपियों पर कसा शिकंजा, 36 करोड़ की संपत्ति जब्त

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
ईडी ने अशोक खरात समेत 6 आरोपियों पर कसा शिकंजा, 36 करोड़ की संपत्ति जब्त

मुंबई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को कहा कि उसने आध्यात्मिक प्रथाओं की आड़ में चलाए जा रहे जबरन वसूली रैकेट से जुड़े धन शोधन के आरोप में स्वघोषित धर्मगुरु अशोक कुमार एकनाथ खरात उर्फ ​​कैप्टन बंधु बाबा, उनकी पत्नी और चार अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है।

ईडी के मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय ने खरात, उनकी पत्नी कल्पना खरात और अन्य आरोपियों के खिलाफ मुंबई की विशेष अदालत (पीएमएलए) में आरोप पत्र दाखिल किया।

बयान में कहा गया है कि इस मामले में अब तक 36.90 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त, अटैच या फ्रीज की जा चुकी है।

इससे पहले, ईडी ने खरात को 19 मई को पीएमएलए की धारा 19 के तहत धन शोधन के अपराध में गिरफ्तार किया था, और वह अभी भी न्यायिक हिरासत में है।

ईडी ने 15 जुलाई को पीएमएलए, 2002 की धारा 5 के तहत आरोपी और उसके परिवार के सदस्यों के नाम पर मौजूद 19.20 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया।

ईडी ने बताया कि यह अप्रैल और मई 2026 के दौरान पीएमएलए की धारा 17 के तहत आरोपी और उसके सहयोगियों से जुड़े विभिन्न परिसरों, बैंक लॉकरों और वाहनों पर की गई तलाशी के दौरान जब्त/फ्रीज की गई 17.70 करोड़ रुपए की संपत्तियों के अतिरिक्त है।

ईडी ने सरकार वाडा, शिरडी, सिन्नर और राहता पुलिस स्टेशनों में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर खरात के खिलाफ जांच शुरू की थी।

ईडी ने बताया कि जांच में पता चला कि खरात ने भक्तों की धार्मिक आस्था का फायदा उठाया और उन्हें 'अवतार पूजा' करने, बीमारियों को ठीक करने, दुर्भाग्य को दूर करने और व्यापार में समृद्धि सुनिश्चित करने के बहाने बेईमानी से धन और संपत्तियां देने के लिए प्रेरित किया, जिससे उसने जबरन वसूली, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी के माध्यम से अपराध की आय अर्जित की।

ईडी ने कहा कि जांच में यह भी पता चला कि खरात ने भक्तों को धोखा देने के लिए खुद को दिव्य शक्तियों से संपन्न और भगवान शिव का अवतार बताया था।

ईडी ने बताया कि उसने एक कर्मचारी की मिलीभगत से कई खातों का फर्जी संचालन करके और बड़ी रकम जमा करने और बाद में परिपक्वता राशि सहित निकासी के लिए कई बेनामी खातों का इस्तेमाल करके दो सहकारी ऋण समितियों के माध्यम से अपराध की धनराशि को मनी लॉन्ड्रिंग किया।

ईडी ने बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग की गई धनराशि को विश्वसनीय सहयोगियों के पास रखा गया था या नासिक, अहमदनगर, सोलापुर, पुणे और मुंबई में अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर अचल संपत्तियों में निवेश किया गया था।

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