मानसून सत्र में विपक्ष का हंगामा जारी, बीजेपी ने कांग्रेस पर संसदीय परंपराओं के अपमान का लगाया आरोप

नई दिल्ली।संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन भी विपक्षी दलों द्वारा किया गया हंगामा देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करता दिखा। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सरकार पर चर्चा से भागने का आरोप लगाया, लेकिन वास्तव में यह स्पष्ट होता जा रहा है कि विपक्ष संसद को संवाद का मंच नहीं, बल्कि राजनीतिक ड्रामा का अड्डा बनाना चाहता है।
वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि "हम बोलना चाहते हैं, लेकिन हमें बोलने नहीं दिया जाता।" हालांकि, राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस पार्टी खुद मुद्दों पर गंभीर चर्चा से बचती रही है और केवल कैमरे के सामने दिखने की राजनीति कर रही है। प्रियंका गांधी का यह बयान तब आया जब सत्र के दौरान विपक्षी सांसदों ने सदन के बाहर नारेबाज़ी और प्रदर्शन किया, जिससे साफ संकेत मिलता है कि उनका उद्देश्य रचनात्मक बहस नहीं, बल्कि केवल सरकार को बदनाम करना है।
भाजपा प्रवक्ताओं ने कांग्रेस और विपक्ष पर संसदीय परंपराओं का अपमान करने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र में बहस का मंच संसद है, सड़क नहीं। सरकार ने बार-बार सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन विपक्ष खुद चर्चा से भागता रहा है।
दरअसल, कांग्रेस बार-बार ऐसे आरोप लगाकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश करती है, जबकि मोदी सरकार संसदीय कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दे रही है। संसद का प्रत्येक मिनट जनता के पैसों से चलता है, और विपक्ष द्वारा किया गया यह व्यवधान केवल संसाधनों की बर्बादी ही नहीं, लोकतंत्र का अपमान भी है। जनता अब समझ चुकी है कि बीजेपी राष्ट्र निर्माण में जुटी है, जबकि कांग्रेस केवल विघटन की राजनीति कर रही है।





