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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:48 · नई दिल्ली संस्करण

इंदौर में 70 करोड़ के ड्रग-मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट पर ईडी का शिकंजा, 3 गिरफ्तार

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
इंदौर में 70 करोड़ के ड्रग-मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट पर ईडी का शिकंजा, 3 गिरफ्तार

भोपाल। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इंदौर उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने लगभग 70 करोड़ रुपये मूल्य के मेफेड्रोन (एमडी) ड्रग तस्करी एवं मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

ईडी के उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने गुरुवार को जानकारी दी कि गिरफ्तार आरोपियों में वेद प्रकाश व्यास, दिनेश अग्रवाल और अक्षय अग्रवाल शामिल हैं। इन्हें धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत चल रही जांच के दौरान गिरफ्तार किया गया। जांच अपराध शाखा इंदौर द्वारा नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई। मामला लगभग 70 किलोग्राम मेफेड्रोन (एमडी) के अवैध कब्जे और तस्करी से संबंधित है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 70 करोड़ रुपये बताई गई है।

ईडी के अनुसार, जांच में सामने आया कि आरोपियों ने मादक पदार्थों की अवैध तस्करी से अर्जित धन को कई व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक बैंक खातों के माध्यम से विभिन्न वित्तीय लेनदेन में उपयोग किया। वित्तीय जांच में बड़े पैमाने पर नकद लेनदेन, धन के प्लेसमेंट, लेयरिंग तथा अपराध से अर्जित आय को छिपाने के संकेत मिले हैं। जांच के दौरान दर्ज बयानों से आरोपियों की नियमित व्यावसायिक गतिविधियों के साथ-साथ मादक पदार्थों की आपूर्ति और तस्करी में संलिप्तता के भी संकेत मिले हैं।

ईडी ने गत 17 जुलाई को इंदौर और मंदसौर स्थित कई परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया था। तलाशी के दौरान आरोपियों की संपत्ति, वित्तीय लेनदेन और व्यावसायिक गतिविधियों से संबंधित आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण तथा अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए गए। मामले में आगे की जांच जारी है।

ईडी ने कहा है कि नशा मुक्त भारत का लक्ष्य केवल मादक पदार्थों की जब्ती से पूरा नहीं होगा, बल्कि अवैध मादक पदार्थों के व्यापार को संचालित करने वाले वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करना भी आवश्यक है। धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत एजेंसी मादक पदार्थों की तस्करी से अर्जित अपराध की आय की पहचान, पता लगाने और उसे जब्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही युवाओं को नशे के खतरे से बचाने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी को भी आवश्यक बताया गया है।

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