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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 9:35 · नई दिल्ली संस्करण

चुनावी राज्यों में ईसीआई सख्त, प्रचार के लिए सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
चुनावी राज्यों में ईसीआई सख्त, प्रचार के लिए सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक

नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 15 मार्च को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के लिए आम चुनावों का कार्यक्रम घोषित किया। इस घोषणा के साथ ही इन 4 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है।

आयोग ने मुख्य सचिवों और मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आदर्श आचार संहिता का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। यह संहिता केंद्र सरकार पर भी लागू होगी, खासकर इन राज्यों से जुड़े घोषणाओं या नीतिगत फैसलों के मामले में।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी, सार्वजनिक या निजी संपत्तियों पर किसी भी तरह का विरूपण (जैसे पोस्टर, बैनर आदि) तुरंत हटाया जाए।

राजनीतिक दल, उम्मीदवार या कोई भी व्यक्ति सरकारी वाहनों, सरकारी आवासों या सरकारी संसाधनों का चुनाव प्रचार के लिए दुरुपयोग नहीं कर सकता। सरकारी खर्च पर विज्ञापन जारी करने पर भी पूरी तरह रोक है। नागरिकों की निजता का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए। किसी की सहमति के बिना निजी घरों, दीवारों या जमीन पर झंडे, पोस्टर या बैनर नहीं लगाए जा सकते। निजी आवासों के बाहर कोई प्रदर्शन या धरना भी नहीं किया जाएगा।

शिकायतों के लिए मजबूत व्यवस्था की गई है।

नागरिक या राजनीतिक दल 1950 नंबर पर कॉल करके या 'सी-विजिल' ऐप के जरिए आचार संहिता उल्लंघन की रिपोर्ट कर सकते हैं। शिकायतों का निपटारा 100 मिनट के अंदर सुनिश्चित करने के लिए इन राज्यों में 5,173 से ज्यादा फ्लाइंग स्क्वॉड और 5,200 से अधिक स्थिर निगरानी दल (एसएसटी) तैनात किए गए हैं।

राजनीतिक दलों को अपनी रैलियों, बैठकों या जुलूसों की जानकारी पहले से पुलिस को देनी होगी ताकि यातायात, सुरक्षा और निषेधाज्ञाओं का पालन हो सके। लाउडस्पीकर या अन्य सुविधाओं के लिए जरूरी अनुमति लेनी अनिवार्य है। मंत्री सरकारी कामों के साथ चुनाव प्रचार नहीं कर सकते और न ही सरकारी मशीनरी, गाड़ी या कर्मचारियों का इस्तेमाल प्रचार के लिए कर सकते हैं।

आयोग ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे एमसीसी लागू करने में पूरी निष्पक्षता बरतें। सभी राजनीतिक दलों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित किया जाए। सरकारी सुविधाओं के गलत इस्तेमाल को रोका जाए। सभाओं, जुलूसों और मतदान की व्यवस्था निष्पक्ष तरीके से की जाए। कानून-व्यवस्था बनाए रखी जाए और चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे।

इसके अलावा, राजनीतिक दलों के लिए 'सुविधा' मॉड्यूल शुरू किया गया है। इसमें वे मैदानों, हेलीपैड जैसी सार्वजनिक जगहों के इस्तेमाल के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवंटन पहले आओ पहले पाओ के आधार पर होगा।

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