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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:35 · नई दिल्ली संस्करण

कांगो में इबोला संकट गहराया, 1,850 मौतें; बच्चे सबसे ज्यादा चपेट में

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
कांगो में इबोला संकट गहराया, 1,850 मौतें; बच्चे सबसे ज्यादा चपेट में

किंशासा। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला वायरस का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। देश के स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा जारी ताजा अपडेट के मुताबिक अब तक 4053 लोगों में इबोला की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें से 1850 लोगों की मौत हो चुकी है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अभी 694 मरीज आइसोलेशन में या अस्पताल में इलाजरत हैं, जबकि 793 लोग ठीक होकर घर लौट चुके हैं। लेकिन पूर्वी डीआरसी में हालात सबसे ज्यादा गंभीर बताए जा रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यूनिसेफ ने गुरुवार को कहा कि इस प्रकोप में अब तक 330 बच्चों की मौत हो चुकी है।

इससे इतुरी प्रांत में जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

यूनिसेफ के अनुसार, "बच्चों में कुल पुष्ट मामलों का लगभग एक चौथाई हिस्सा है, लेकिन मौतों में उनका हिस्सा लगभग एक तिहाई है। 5 साल से कम उम्र के छोटे बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, उनमें मृत्यु दर वयस्कों की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है।"

संगठन ने बताया कि इबोला के डर और स्वास्थ्य केंद्रों में रुकावट के कारण परिवार अस्पताल जाने से कतरा रहे हैं। इससे बचपन के टीकाकरण, मातृ स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सेवाओं में भारी गिरावट आई है।

यूनिसेफ के डीआरसी प्रतिनिधि जॉन एगबोर ने कहा, "इबोला का प्रकोप पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था को बाधित कर रहा है। इसका सीधा असर मलेरिया, डायरिया और अन्य इलाज योग्य बीमारियों पर पड़ेगा, जो बच्चों की मौत की सबसे बड़ी वजह हैं।"

अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा संगठन मेडेसिन्स सैन्स फ्रंटियर्स ने बुधवार को चेतावनी दी कि पूर्वी डीआरसी में इबोला की स्थिति पहले से कहीं ज्यादा गंभीर है। संगठन के मुताबिक संक्रमण अभूतपूर्व गति से फैल रहा है और इसके धीमा होने के कोई संकेत नहीं हैं। डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने कहा कि अस्पतालों में बेड की कमी, मेडिकल स्टाफ पर दबाव और समुदायों में डर की वजह से मरीज समय पर इलाज नहीं ले पा रहे हैं।

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