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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:36 · नई दिल्ली संस्करण

डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया ‘राष्ट्रीय बायोबैंक’ का उद्घाटन, भारत को मिलेगा अपना अनूठा स्वास्थ्य डेटाबेस

राष्ट्रीय सागर डेस्क4 मिनट का पठन
डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया ‘राष्ट्रीय बायोबैंक’ का उद्घाटन, भारत को मिलेगा अपना अनूठा स्वास्थ्य डेटाबेस

डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया ‘राष्ट्रीय बायोबैंक’ का उद्घाटन, भारत को मिलेगा अपना अनूठा स्वास्थ्य डेटाबेस

नई दिल्ली, 6 जुलाई 2025 :भारत ने एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि की ओर कदम बढ़ाते हुए आज राजधानी दिल्ली स्थित सीएसआईआर-आईजीआईबी (इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी) में 'राष्ट्रीय बायोबैंक' (National Biobank) का उद्घाटन किया। इस परियोजना की शुरुआत केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और सीएसआईआर के उपाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र सिंह ने की। यह पहल भारत के पहले दीर्घकालिक और व्यापक स्वास्थ्य एवं जीनोमिक डेटा संग्रह की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है, जिसका उद्देश्य हर भारतीय को व्यक्तिगत (पर्सनलाइज़्ड) चिकित्सा की सुविधा देना है।

राष्ट्रीय बायोबैंक क्या है?

राष्ट्रीय बायोबैंक, भारत का अपना अनुदैर्ध्य जनसंख्या अध्ययन (longitudinal population study) है, जिसके तहत पूरे देश से 10,000 से अधिक लोगों का जीनोमिक, जीवनशैली और क्लीनिकल डेटा इकट्ठा किया जाएगा। यह पहल ब्रिटेन के यूके बायोबैंक की तर्ज पर बनाई गई है, लेकिन भारतीय भूगोल, जातीयता और सामाजिक-सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखते हुए इसे पूरी तरह देशज रूप में विकसित किया गया है। यह बायोबैंक एक राष्ट्रव्यापी 'कोहोर्ट स्टडी' की रीढ़ बनेगा, जो भारत की स्वास्थ्य प्रणाली और शोध क्षमताओं को विश्व स्तर पर सशक्त बनाएगा।

इसका क्या होगा उपयोग?

बायोबैंक से प्राप्त डेटा का उपयोग भारत में मधुमेह, कैंसर, हृदय रोग, सिकल सेल एनीमिया और दुर्लभ आनुवंशिक विकारों जैसे रोगों की समझ, निदान, उपचार और रोकथाम में किया जाएगा। इससे वैज्ञानिकों को यह जानने में मदद मिलेगी कि जीन और पर्यावरण किस तरह बीमारियों को जन्म देते हैं या उनके इलाज में बाधा बनते हैं। इसके अलावा यह एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स, जीन-आधारित उपचार, और जनसंख्या-विशिष्ट स्वास्थ्य नीतियों को विकसित करने में भी सहायक होगा।

"व्यक्तिगत चिकित्सा" की ओर भारत का कदम :

डॉ. जितेंद्र सिंह ने उद्घाटन समारोह में कहा, "आज हम एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं, जहां हर भारतीय को उसकी अनुवांशिक बनावट, जीवनशैली और पर्यावरण के अनुरूप उपचार मिलेगा।" उन्होंने कहा कि यह बदलाव अब केवल विचार नहीं, बल्कि स्वदेशी वैज्ञानिक नवाचारों के बल पर साकार हो रहा है। मंत्री ने विशेष रूप से भारतीयों में केंद्रीय मोटापे की उपेक्षित समस्या की चर्चा करते हुए कहा कि देश को जनसंख्या-विशिष्ट स्वास्थ्य रणनीतियों की आवश्यकता है और बायोबैंक इसी दिशा में मदद करेगा।

नवाचार और अनुसंधान की नई दिशा :

इस अवसर पर मंत्री ने क्वांटम टेक्नोलॉजी, सीआरआईएसपीआर-जीन एडिटिंग, और एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (AMR) जैसे क्षेत्रों में भारत की तेज़ प्रगति को रेखांकित किया और कहा कि भारत अब अनुसंधान में पीछे नहीं, बल्कि कई बार आगे है। उन्होंने कहा कि बायोबैंक से उच्च गुणवत्ता वाला डेटा तैयार होगा, जिससे AI-संचालित स्वास्थ्य मॉडल और जीन-चालित उपचार और बेहतर बनाए जा सकेंगे।

शोध प्रयोगशाला से समाज तक :

डॉ. सिंह ने वैज्ञानिकों और निजी क्षेत्र के उद्योगों से आह्वान किया कि शोध को प्रयोगशालाओं तक सीमित न रखें, बल्कि उसे उद्योग और आम जनता तक ले जाएं। उन्होंने AMR और दवा विकास जैसे क्षेत्रों में सरकारी विभागों और निजी भागीदारों के साथ मिलकर गहन सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

वैज्ञानिकों का समर्पण और संस्थान की उपलब्धियाँ :

सीएसआईआर-आईजीआईबी के निदेशक डॉ. सौविक मैती ने बताया कि संस्थान ने पहले भी मानव जीनोम डिकोड करने, कोविड-19 के जीनोमिक अनुक्रमण, दुर्लभ आनुवंशिक रोगों के 300 से अधिक निदान और भारत की पहली फार्माको-जीनोमिक परियोजना जैसी बड़ी उपलब्धियाँ हासिल की हैं। वर्तमान में संस्थान महिला स्वास्थ्य, स्तन कैंसर जीनोमिक्स, और स्वदेशी सीआरआईएसपीआर उपचारों पर भी काम कर रहा है। इसके अतिरिक्त, संस्थान ने भारतीय वायुसेना के साथ मिलकर अंतरिक्ष जैव विज्ञान और पायलट फिटनेस में एआई के उपयोग जैसे क्षेत्रों में भी शोध कार्य प्रारंभ किया है।

आत्मनिर्भर स्वास्थ्य प्रणाली की दिशा में:

सीएसआईआर महानिदेशक डॉ. एन. कलईसेलवी ने इसे भारत के लिए स्वास्थ्य डेटा में आत्मनिर्भरता की दिशा में "बेबी स्टेप" बताते हुए कहा कि यह परियोजना एक दिन वैश्विक मानकों को चुनौती दे सकती है या उन्हें पीछे छोड़ सकती है। उन्होंने आदिवासी समुदायों में सिकल सेल रोग की रोकथाम के लिए चल रहे शोधों की भी सराहना की।

राष्ट्रीय बायोबैंक, भारत को स्वदेशी और वैज्ञानिक रूप से सशक्त हेल्थकेयर इकोसिस्टम की ओर ले जाने वाला एक ऐतिहासिक कदम है। इससे न केवल शोधकर्ताओं को बेहतर डेटा मिलेगा, बल्कि आम भारतीय नागरिक को भी सस्ता, सटीक और व्यक्तिगत स्वास्थ्य समाधान प्राप्त होगा। यह पहल भारत को नवाचार, आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की नई ऊँचाइयों तक ले जाने में अहम भूमिका निभाएगी।

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