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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:34 · नई दिल्ली संस्करण

प्रदुषित हो रही गंगा, डॉल्फिन के अस्तित्व पर संकट

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
प्रदुषित हो रही गंगा, डॉल्फिन के अस्तित्व पर संकट

भागलपुर,। विलुप्तप्राय राष्ट्रीय जलीय जीव डॉल्फिन के संरक्षण को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। हालांकि डॉल्फिन के संरक्षण के लिए जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से बिहार में पांच अक्टूबर को डॉल्फिन दिवस के रूप में मनाया जाता है।

इस राष्ट्रीय जलीय जीव को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। पटना विश्वविद्यालय परिसर में गंगा नदी के किनारे भारत का पहला राष्ट्रीय डॉल्फिन अनुसंधान केंद्र (एनडीआरसी) स्थापित किया गया है, जहां गंगा डॉल्फिन के व्यवहार और संरक्षण पर शोध किया जाता है।

भागलपुर जिले में सुल्तानगंज से लेकर कहलगांव के बीच गंगा नदी का करीब 60 किलोमीटर लंबा क्षेत्र विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन अभ्यारण्य बनाया गया है। यहां अवैध शिकार और मछली पकड़ने वाले जालों पर कड़ी नजर रखी जाती है।

केंद्र सरकार भी प्रोजेक्ट डॉल्फिन नामक परियोजना के तहत बिहार को केंद्र में रखकर इसकी आबादी बढ़ाने तथा उनके आवास परिक्षेत्र को सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त बनाने पर काम कर रही है। इसके अलावा बिहार सरकार वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के सहयोग से इनकी सुरक्षा और संरक्षण के लिए स्थानीय मछुआरों को जागरूक कर रही है।

केंद्र की नमामि गंगे योजना के तहत गंगा नदी में प्रदूषण कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि, जैव विविधता कायम रहे और जलीय जीवों की आबादी बढ़ती रहे। गंगा प्रहरी और डॉल्फिन मित्र भी इस अभियान में शामिल है। वर्ल्ड बैंक और राज्य के वन विभागों की मदद से स्थानीय मछुआरों और युवकों को प्रशिक्षित कर डॉल्फिन मित्र बनाया गया है, ताकि संकट में फंसी गंगा डॉल्फिन को समय रहते मदद मिल सके और लोगों के बीच इसके संरक्षण को लेकर जागरुकता फैल सके।

पर्यावरण विद दीपक कुमार उर्फ झुन्नू बताते हैं कि सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास एक हद तक कारगर रहे हैं, तभी तो इनकी संख्या लगभग स्थिर है और अवैध शिकार में भी कमी आई है। मूल बात यह कि हम गंगा डॉल्फिन या अन्य जलीय जीवों को तभी बचा सकेंगे, जब हम गंगा को बचाएंगे। इसके साथ ही गंगा नदी डॉल्फिन प्लेटफॉर्म के सभी हितधारकों को पूरे समन्वय के साथ मिलकर काम करना होगा।

गांगेय डॉल्फिन के संरक्षण और भागलपुर स्थित डॉल्फिन अभयारण्य के विकास को लेकर प्रशासनिक सुस्ती और फंड के इस्तेमाल पर अब सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि डॉल्फिन अभयारण्य के एनओसी के नाम पर क्लीयरेंस फंड में करोड़ों की राशि जमा है, लेकिन विकास कार्य फाइलों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।

नियम के अनुसार इस राशि का उपयोग डॉल्फिन अभयारण्य के विकास और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र की बेहतरी के लिए होना चाहिए था, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उल्लेखनीय है कि गंगा नदी डॉल्फिन मछलियों से भरपूर और अशांत गहरे जल में पनपती है और कम तेज धारा वाले क्षेत्र में निवास करती है। 2009 में इसे राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया था। इसका शिकार प्रतिबंधित है।

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