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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:08 · नई दिल्ली संस्करण

मेट्रो निर्माण स्थलों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, 20 किमी बैरिकेडिंग और 17 किमी एलईडी लाइट से बढ़ी दृश्यता

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
मेट्रो निर्माण स्थलों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, 20 किमी बैरिकेडिंग और 17 किमी एलईडी लाइट से बढ़ी दृश्यता

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में चल रहे दिल्ली मेट्रो के निर्माण कार्यों के दौरान वाहनों और पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने व्यापक इंतजाम किए हैं। इस समय शहर के विभिन्न हिस्सों में लगभग 20 किलोमीटर लंबी बैरिकेडिंग लगाई गई है, ताकि निर्माण स्थलों के आसपास आवागमन सुरक्षित बना रहे। खासकर सर्दियों के मौसम में कोहरे और कम दृश्यता को देखते हुए इन बैरिकेड्स पर करीब 17 किलोमीटर एलईडी रोप लाइट और ब्लिंकर लगाए गए हैं, जिससे रात के समय भी ये दूर से स्पष्ट दिखाई दें।डीएमआरसी के प्रधान कार्यकारी निदेशक अनुज दयाल ने रविवार काे जानकारी देते हुए बताया कि निर्माण स्थलों के आसपास यातायात को सुचारू और सुरक्षित बनाए रखने के लिए 270 से अधिक ट्रैफिक मार्शल चौबीसों घंटे तैनात किए गए हैं। ये सभी मार्शल ट्रैफिक विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षित हैं और भारी मशीनरी, क्रेन तथा अन्य उपकरणों की रात के समय सुरक्षित आवाजाही में अहम भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, सड़कों पर रोड स्टड्स लगाए गए हैं, जिससे वाहन चालक संवेदनशील निर्माण स्थलों के पास पहुंचते ही गति कम कर सकें। ‘वर्क इन प्रोग्रेस’ और ‘डायवर्जन अहेड’ जैसे चेतावनी संकेत भी पर्याप्त संख्या में लगाए गए हैं।फेज-4 में नई सुरक्षा व्यवस्थाप्रधान कार्यकारी निदेशक ने आगे बताया कि दिल्ली मेट्रो के फेज-4 प्रोजेक्ट के तहत विशेष ‘इम्पैक्ट प्रोटेक्शन व्हीकल’ को शामिल किया गया है। ये वाहन सड़क पर भारी मशीनों की आवाजाही और क्रेन की स्थापना के दौरान श्रमिकों और अन्य वाहनों की सुरक्षा के लिए तैनात किए जाते हैं। इन वाहनों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि तेज रफ्तार या लापरवाही से चलने वाले वाहनों के टकराने की स्थिति में भी नुकसान को कम किया जा सके। वहीं सर्दियों के मौसम में दिन और रात दोनों समय घने कोहरे के कारण दृश्यता काफी कम हो जाती है। इसे ध्यान में रखते हुए डीएमआरसी की सेफ्टी टीमें अतिरिक्त कदम उठा रही हैं। बैरिकेड्स पर एलईडी लाइट और ब्लिंकर के साथ-साथ फॉग लाइट भी लगाई गई हैं। वहीं, निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों के हेलमेट पर रिफ्लेक्टिव टेप और हाई-विजिबिलिटी जैकेट अनिवार्य की गई हैं, ताकि वे दूर से ही दिखाई दे सकें।डायवर्जन और तीन-स्तरीय सुरक्षाप्रधान कार्यकारी निदेशक ने बताया कि जहां-जहां सड़क डायवर्जन लागू किए गए हैं, वहां पर्याप्त सूचना बोर्ड और संकेतक लगाए गए हैं। हर डायवर्जन की योजना दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के साथ समन्वय कर तैयार की जाती है। इन स्थानों पर सुरक्षा के लिए तीन-स्तरीय व्यवस्था लागू की गई है, जिसमें प्लास्टिक बैरियर, रेत या पानी से भरे ड्रम और कंक्रीट क्रैश बैरियर शामिल हैं। इसके अलावा तेज हवा या मानसून के दौरान बैरिकेड्स को स्थिर रखने के लिए उन्हें नीचे से भारी बनाया गया है और जमीन में कील से मजबूती से जोड़ा गया है। इन्हें और मजबूत करने के लिए नट-बोल्ट की मदद से बैरिकेड्स को आपस में भी जोड़ा गया है, जिससे वे प्रतिकूल मौसम में भी गिरे नहीं। इसके अलावा, कंक्रीट क्रैश बैरियर का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो निर्माण स्थलों के भीतर मौजूद भारी मशीनों से टकराने की स्थिति में वाहनों को सुरक्षा प्रदान करते हैं। खास बात यह है कि ये बैरियर निर्माण कचरे के पुनर्चक्रण से बनाए गए हैं, जिससे ये पर्यावरण के अनुकूल भी हैं।डीएमआरसी ने सुरक्षा सामग्री की गुणवत्ता और एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए ठेका शर्तों में ट्रैफिक मैनेजमेंट से संबंधित एक अलग अध्याय शामिल किया है, जो सभी ठेकेदारों पर बाध्यकारी है। ये दिशा-निर्देश दिल्ली मेट्रो के पहले चरण के अनुभवों और भारतीय सड़क कांग्रेस (आईआरसी -67 कोड) के मानकों के अनुसार तैयार किए गए हैं।

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