स्वाति मालीवाल मामले में बिभव कुमार की गिरफ्तारी के बाद अग्रिम जमानत याचिका खारिज
नई
दिल्ली, दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट के एडिशनल सेशंस जज
सुशील अनुज त्यागी ने आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सदस्य स्वाति मालीवाल के
साथ मारपीट के आरोपित बिभव कुमार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।
कोर्ट ने कहा कि बिभव कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है, ऐसे में अग्रिम
जमानत याचिका का कोई मतलब नहीं है।
सुनवाई के दौरान बिभव
कुमार की ओर से पेश वकील हरिहरन ने कहा कि बिभव कुमार दोपहर 12 बजे से
पुलिस स्टेशन में मौजूद हैं। उनकी गिरफ्तारी की आशंका है। उन पर भारतीय दंड
संहिता की धारा 308 समेत अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। उन
पर कोई ऐसी धारा नहीं लगी है, जिसमें सात साल से ज़्यादा की सज़ा हो। पुलिस
थाने में क्या हो रहा है और बिभव की स्थिति क्या है, उसके बारे में भी
हमें नहीं पता है। हरिहरन ने बिभव को गिरफ्तार किये जाने की आशंका है।
हालांकि, उन पर लगाए गए आरोप भरोसे के लायक नहीं है।
हरिहरन
ने स्वाति मालीवाल की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर को पढ़ते हुए कहा कि ये
समझ से परे है। बिभव ऐसे मारपीट क्यों करना शुरू कर देंगे। मुख्यमंत्री
आवास पर कोई ऐसी हरकत क्यों करेगा। हरिहरन ने कहा कि जहां पर घटना हुई है,
वहां पर सीसीटीवी मौजूद है। कायदे के मुताबिक मुख्यमंत्री से मुलाक़ात के
लिए पहले मिलने की अनुमति ज़रूरी है लेकिन स्वाति ने मुख्यमंत्री की
सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के घर
पर अगर वाकई में स्वाति के साथ वाकई मारपीट हुई होती तो वह चिल्लाती तो
क्या ये संभव है कि कोई उसकी चीख को नहीं सुन पाता, जबकि वहां लोग भी मौजूद
थे। बिभव कुमार के वकीलों की ओर से कोर्ट को कुछ वीडियो दिखाए गए। वीडियो
की जानकारी देते हुए बिभव के वकील ने कहा कि वीडियो में स्वाति मालीवाल
सोफे पर बैठे हुए नज़र आ रही हैं। उस समय तक वह पुलिस को कॉल कर चुकी थी और
वह नौकरी खा जाने की धमकी दे रही हैं। बिभव की ओर से दूसरा वीडियो कोर्ट
को दिखाया गया, जिसमें स्वाति मालीवाल मुख्यमंत्री आवास से बाहर निकलती दिख
रही हैं। स्वाति मालीवाल कुर्ती पहने हुए है, उसमें कोई बटन नहीं है तो
बटन तोड़ने का कोई सवाल ही नहीं उठता। साथ ही स्वाति मालीवाल को कल कोर्ट
में लाते समय का वीडियो भी कोर्ट को दिखाया गया। बिभव के वकील ने कहा कि
चार दिन बाद स्वाति मालीवाल का वीडियो आया, जिसमें उनको चलने में दिक्कत हो
रहीं है लेकिन जब वह मुख्यमंत्री आवास से निकली थीं तो ऐसी कोई दिक्कत
नहीं थी।
बिभव के वकील ने कहा कि मुख्यमंत्री की अपनी व्यस्तता हो
सकती है, ऐसे में स्वाति का मुख्यमंत्री से मुलाकात की जिद करना कैसे जायज
है। बिभव के वकील ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज में कहीं भी स्वाति मालीवाल के
साथ मारपीट की पुष्टि नहीं होती है। इसलिए बिभव को अंतरिम राहत दी जाए।
उन्होंने कहा कि अगर पुलिस को शिकायत देने में भी तीन दिन लग रहे हैं तो
य़ह साफ है कि इस दौरान स्वाति साजिश रच रही थी।
सुनवाई
के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील अतुल श्रीवास्तव ने कहा कि बिभव
के वकील ने जो तथ्य रखे हैं, फ़िलहाल वो मामले एकतरफा तस्वीर है। बिना जांच
अधिकारी का जवाब आये कोर्ट को कोई राहत देने का फैसला नहीं लेना चाहिए।
जांच अधिकारी का जवाब आने के बाद तय होगा कि केस के असल तथ्य क्या है।
उन्होंने कहा कि एफआईआर में स्वाति ने ख़ुद साफ किया कि उसने पुलिस को
अप्रोच करने में देरी क्यों की। वो इस घटना के बाद ट्रॉमा में थी, इस वजह
से देरी हुई।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने बिभव की
अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस के वकील ने उन्हें
बताया कि बिभव को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसलिए अग्रिम जमानत याचिका का
कोई मतलब नहीं है।
इस मामले में स्वाति मालीवाल ने 17 मई को कोर्ट
में अपना बयान दर्ज कराया था। घटना 13 मई की है। दिल्ली पुलिस ने 16 मई को
स्वाति मालीवाल के बयान लेकर एफआईआर दर्ज की थी।





