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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:19 · नई दिल्ली संस्करण

यूपीआई से लेनदेन में बढ़त के बाद भी देश में तेजी से बढ़ रहा मुद्रा का चलन, सर्कुलेशन 40 लाख करोड़ रुपए पहुंचा : रिपोर्ट

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
यूपीआई से लेनदेन में बढ़त के बाद भी देश में तेजी से बढ़ रहा मुद्रा का चलन, सर्कुलेशन 40 लाख करोड़ रुपए पहुंचा : रिपोर्ट

मुंबई। देश में करेंसी सर्कुलेशन जनवरी 2026 के अंत तक बढ़कर रिकॉर्ड 40 लाख करोड़ रुपए के करीब पहुंच गया है। इसमें सालाना आधार पर 11.1 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है, जो कि पिछले साल समान अवधि में 5.3 प्रतिशत थी। यह जानकारी सोमवार को जारी हुई एक रिपोर्ट में दी गई।

एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में बताया गया कि जनता के पास करेंसी (सीडब्ल्यूपी) की हिस्सेदारी कुल करेंसी सर्कुलेशन में 97.6 प्रतिशत (करीब 39 लाख करोड़ रुपए ) हो गई है।

रिपोर्ट में बताया गया कि देश में यूपीआई के कारण डिजिटल लेनदेन तेजी से बढ़ा है और इससे कैश-टू-जीडीपी रेश्यो में बड़ी गिरावट देखने को मिली है।

रिपोर्ट के मुताबिक,"देश में एक महीने में होने वाले यूपीआई लेनदेन की वैल्यू करीब 28 लाख करोड़ रुपए है, जो कि देश के कुल करेंसी स्टॉक का करीब 70 प्रतिशत है, जो कि दिखाता है कि देश में बड़ी संख्या में लोग डिजिटल पेमेंट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।"

वहीं, देश का कैश-टू-जीडीपी रेश्यो वित्त वर्ष 26 में कम होकर 11 प्रतिशत हो गया है, जो कि वित्त वर्ष 21 में 14.4 प्रतिशत पर था।

रिपोर्ट में कहा गया है, "करेंसी और जीडीपी में परिवर्तन की दिशा भले ही एक जैसी हो, लेकिन जीडीपी की वृद्धि को अब नकदी के बजाय यूपीआई के माध्यम से अधिक हो रही है।"

सीआरआर में कटौती के कारण चालू वित्त वर्ष में 'आरबीआई के पास बैंकर्स डिपॉजिट' में 1.86 लाख करोड़ रुपए की कमी आई, जिसके परिणामस्वरूप रिजर्व मनी की वृद्धि घटकर 5.8 प्रतिशत रह गई।

एसबीआई रिसर्च की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2015 से वित्त वर्ष 2025 के बीच बैंकों में जमा और ऋण लगभग तीन गुना बढ़ गए, जो बैंकिंग प्रणाली के सुदृढ़ीकरण और ऋण मध्यस्थता में सुधार का संकेत है।

वित्त वर्ष 2015 से वित्त वर्ष 2025 के दौरान जमा राशि 85.3 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 241.5 लाख करोड़ रुपए हो गई और ऋण 67.4 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 191.2 लाख करोड़ रुपए हो गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंकों की परिसंपत्ति वृद्धि दर वित्त वर्ष 2025 तक जीडीपी के 77 प्रतिशत से बढ़कर 94 प्रतिशत हो गई, जो वित्तीय सुदृढ़ीकरण में सुधार को दर्शाती है।

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