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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:17 · नई दिल्ली संस्करण

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने कहा, गैर भाजपा शासित राज्यों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाकर जनता पर महंगाई का बोझ डाला

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन

नई

दिल्ली,। गैर भाजपा शासित राज्यों में पेट्रोल व डीजल की

बढ़ती कीमतों पर केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह

पुरी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि गैर भाजपा शासित

राज्य सरकारों ने जनता पर महंगाई का बोझ डाल दिया है।

सोमवार को

मीडिया से बातचीत में हरदीप सिंह पुरी बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

ने दो बार उत्पाद शुल्क कम किया, जिसकी वजह से भाजपा शासित राज्यों में

पेट्रोल व डीजल की कीमतें कम रहीं। वहीं गैर भाजपा शासित राज्यों में वैट

लगा दिया गया,जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ गईं। उन्होंने यह भी कहा कि

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अशांति के बावजूद डीजल पेट्रोल की कीमतों पर

नियंत्रण रखने में केंद्र सरकार सक्षम रही।

केंद्रीय

पेट्रोलियम पुरी ने बताया कि कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान पेश किए गए

पेट्रोल बांड की कीमत आज तक केंद्र सरकार चुका रही है। उन्होंने आंकड़ा

देते हुए कहा कि 2004 और 2014 के बीच कांग्रेस ने पेट्रोल बांड पेश किए।

इसके तहत कांग्रेस ने 1.41 लाख करोड़ रुपये जारी किए और आज केंद्र सरकार को

3.20 लाख करोड़ रुपये वापस करने पड़ रहे हैं।

उन्होंने यह भी

बताया कि वैट के आंकड़ों पर गौर करें तो यह स्पष्ट हो जाता है कि ईटानगर और

चेन्नई के बीच पेट्रोल की कीमत में 9.90 रुपये, लखनऊ और तेलंगाना के बीच

12.76 रुपये, गांधीनगर और बेंगलुरु के बीच 8.21 रुपये का अंतर है। जबकि

पणजी और केरल के बीच 12.35 रुपये, गुवाहाटी और कोलकाता के बीच 6.80 रुपये

का अंतर है। गैर भाजपा शासित राज्यों में पेट्राेल और डीजल पर वैट लगाए

जाने की वजह से कीमतें बढ़ी हैं।

पुरी ने पत्रकारों को

बताया कि भारत एकमात्र देश है, जहां निश्चित अवधि में पेट्रोल और डीजल की

कीमतें ऊपर जाने के बजाय 2 प्रतिशत या उससे अधिक की कमी आई है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दो मौकों पर 21 नवंबर और मई 2022 को केंद्र

द्वारा लगाए गए उत्पाद शुल्क को कम कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप

केंद्रीय उत्पाद शुल्क में कमी आई और सभी भाजपा राज्यों ने भी वैट कम कर

दिया।

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी

ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमत काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय प्रचलित कीमत

के कारण निर्धारित होती है क्योंकि हम कच्चे तेल की अपनी जरूरतों का 85

प्रतिशत आयात करते हैं।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कीमत बढ़ने

से 2004 से 2014 के बीच बेंगलुरु में पेट्रोल की कीमत 84 प्रतिशत और डीजल

की कीमत 111 तक बढ़ गईं। इस दौरान कांग्रेस गठबंधन की सरकार थी। जबकि 2014

से 2024 तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अशांति रही फिर भी हम अंतरराष्ट्रीय

स्थिति से निपटने में सक्षम हैं। इस दौरान माेदी की सरकार रही।

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