दिल्ली वक्फ बोर्ड: जीशान हैदर और दाऊद नासिर की जमानत याचिकाओं पर फैसला 01 जुलाई को
नई
दिल्ली, । दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की
बेंच 01 जुलाई को दिल्ली वक्फ बोर्ड की भर्ती से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग
मामले में जीशान हैदर और दाऊद नासिर की जमानत याचिकाओं पर फैसला सुनाएगी।
हाई कोर्ट ने जीशान हैदर और दाऊद नासिर की जमानत याचिकाओं पर 31 मई को
फैसला सुरक्षित रख लिया था।
हाई कोर्ट ने 28 मार्च को दोनों की
जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ईडी को नोटिस जारी किया था। राऊज
एवेन्यू कोर्ट ने 22 फरवरी को दाऊद नासिर की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
ईडी ने 09 जनवरी को चार्जशीट दाखिल की थी। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 19 जनवरी
को ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लिया था। करीब पांच हजार पेज की चार्जशीट ने
ईडी ने जावेद इमाम सिद्दीकी, दाऊद नासिर, कौसर इमाम सिद्दीकी और जीशान
हैदर को आरोपित बनाया है। ईडी ने पार्टनरशिप फर्म स्काई पावर को भी आरोपित
बनाया है।
ईडी के मुताबिक ये मामला 13 करोड़ 40 लाख रुपये
की जमीन की बिक्री से जुड़ा हुआ है। ईडी के मुताबिक आम आदमी पार्टी (आआपा)
विधायक अमानतुल्लाह खान के अज्ञात स्रोतों से अर्जित संपत्ति से जमीनें
खरीदी और बेची गई। आरोपित कौसर इमाम सिद्दीकी की डायरी में 08 करोड़ रुपये
की एंट्री की गई है। जावेद इमाम को ये संपत्ति सेल डीड के जरिए मिली। जावेद
इमाम ने ये संपत्ति 13 करोड़ 40 लाख में बेची। जीशान हैदर ने इसके लिए
जावेद को नकद राशि दी।
इस मामले में सीबीआई ने 23 नवंबर 2016 को
आआपा विधायक अमानतुल्लाह खान समेत 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
जांच के बाद सीबीआई ने 21 अगस्त 2022 को चार्जशीट दाखिल की। सीबीआई के
मुताबिक दिल्ली वक्फ बोर्ड के सीईओ और संविदा पर दूसरी नियुक्तियों में
गड़बड़ियां की गई। सीबीआई की चार्जशीट में कहा गया है कि इन नियुक्तियों के
लिए अमानतुल्लाह खान ने महबूब आलम और दूसरे आरोपितों के साथ साजिश रची,
जिन्हें वक्फ बोर्ड में विभिन्न पदों पर नियुक्त किया गया था।





