मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:50 · नई दिल्ली संस्करण

दिल्ली-साउथ वेस्ट साइबर पुलिस ने पकड़ा बड़ा इन्वेस्टमेंट फ्रॉड रैकेट, 11 साइबर ठग गिरफ्तार

राष्ट्रीय सागर डेस्क5 मिनट का पठन
दिल्ली-साउथ वेस्ट साइबर पुलिस ने पकड़ा बड़ा इन्वेस्टमेंट फ्रॉड रैकेट, 11 साइबर ठग गिरफ्तार

नई दिल्ली। दिल्ली के साउथ-वेस्ट डिस्ट्रिक्ट की साइबर पुलिस ने एक बड़े इन्वेस्टमेंट फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश किया है, जो दिल्ली, राजस्थान और मुंबई से ऑपरेट हो रहा था। इस पूरे मामले में पुलिस ने 11 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है, जो लोगों को हाई रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट का लालच देकर ठगी करते थे।

इस गिरोह का शिकार एक 60 साल के बुजुर्ग व्यक्ति भी हुए, जिनसे करीब 22.67 लाख रुपए की ठगी की गई। पुलिस ने आरोपियों के पास से भारी मात्रा में सामान भी बरामद किया है, जिसमें 40 मोबाइल फोन, 92 फर्जी सिम कार्ड, 39 पासबुक और चेकबुक, 27 एटीएम कार्ड, 4 पैन कार्ड, एक लैपटॉप, एक डेस्कटॉप, 2 पीओएस मशीन, 6 यूपीआई स्कैनर, एक प्रिंटर और कई फर्जी दस्तावेज शामिल हैं।

ये दस्तावेज खासतौर पर फर्जी बैंक अकाउंट खोलने के लिए इस्तेमाल किए जाते थे।

पूरा मामला 21 नवंबर 2025 को सामने आया, जब पीड़ित ने साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि फेसबुक पर एक विज्ञापन के जरिए उन्हें निवेश का ऑफर मिला, जिसमें वित्त मंत्री के भाषण का गलत इस्तेमाल किया गया था और एआई आधारित ट्रेडिंग से मोटा मुनाफा कमाने का दावा किया गया था।

जैसे ही उन्होंने उस लिंक पर रजिस्ट्रेशन किया, ठगों ने उनसे संपर्क करना शुरू कर दिया।

खुद को निवेश सलाहकार बताकर आरोपियों ने फोन और व्हाट्सऐप के जरिए बातचीत की और उन्हें मुद्रावन ऐप और 9 प्रो जैसे प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर कराया। इसके बाद उनसे क्रेओविया टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर पैसा निवेश करवाया गया। शुरुआत में सब कुछ सही दिखाया गया, लेकिन जैसे ही बड़ी रकम ट्रांसफर हुई, आरोपी अचानक गायब हो गए और उनका संपर्क पूरी तरह बंद हो गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर पुलिस ने एक स्पेशल टीम बनाई, जिसमें एसआई लव देशवाल, हेड कांस्टेबल सचिन, राजेश और राकेश शामिल थे। इस टीम ने इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक और एसीपी संघमित्रा की निगरानी में जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने मनी ट्रेल एनालिसिस, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल फुटप्रिंट, सोशल मीडिया एनालिसिस और टेक्निकल सर्विलांस जैसे कई आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल किया।

इन सभी कोशिशों के बाद पुलिस को पता चला कि यह गिरोह दिल्ली के रोहिणी और नेताजी सुभाष प्लेस से ऑपरेट हो रहा है।

पुलिस ने इनपुट के आधार पर रोहिणी और नेताजी सुभाष प्लेस क्षेत्र में छापेमारी की, जहां से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। तजिंदर सिंह उर्फ ​​लकी (26), आशीष सैनी (24), शिव दयाल सिंह (28), शिवा (18) और गिरिराज किशोर (18) को गिरफ्तार किया गया। यहां एक पूरा ऑफिस सेटअप चल रहा था, जहां फर्जी बैंक अकाउंट खोले और ऑपरेट किए जाते थे। मौके से बड़ी संख्या में सिम कार्ड, मोबाइल फोन, चेकबुक, एटीएम कार्ड और कंपनी के फर्जी स्टैंप भी मिले।

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे नेताजी सुभाष प्लेस क्षेत्र में फ्रंट ऑफिस चलाते थे, जबकि रोहिणी के दीप विहार में बैकएंड से काम होता था।

ये लोग फर्जी (म्यूल अकाउंट) बनाकर दूसरे ठगों को सप्लाई करते थे, जिनके जरिए ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में घुमाया जाता था।

आगे की जांच के दौरान प्रतिभा उर्फ पायल और सतीश नाम के दो और अकाउंट होल्डर की पहचान की गई और उन्हें म्यूल अकाउंट चलाने में मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को मुंबई कनेक्शन का भी पता चला। मनी ट्रेल के आगे एनालिसिस से पता चला कि ठगी की गई रकम को कई लेयर से रूट किया गया और गोरेगांव ईस्ट, मुंबई में खोले गए एक्सिस बैंक अकाउंट (दूसरी लेयर) में जमा किया गया।

मुंबई से ऑपरेट करने वाला एक और सिंडिकेट भी शामिल था, जो म्यूल बैंक अकाउंट खरीदने में लगा था। टेक्निकल सर्विलांस और एनालिसिस से उन आरोपियों की पहचान हुई जो नेटवर्क चलाने के लिए बिजय नगर, ब्यावर (राजस्थान) से मुंबई शिफ्ट हो गए थे।

इसके बाद पुलिस ने राजस्थान के ब्यावर जिले के बिजयनगर में भी छापेमारी की, जहां से चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनकी पहचान रामदेव सांगला (50), प्रवीण कुमावत उर्फ ​​लकी (20 साल), दीपक मेवाड़ा उर्फ ​​देव (35 साल) और त्रिलोक चंद नायक (32 साल) के रूप में हुई।

आरोपियों ने बताया कि उन्होंने 'म्यूल अकाउंट' (किराए के बैंक खाते) का इंतजाम किया और उन्हें मुंबई से काम करने वाले एक 'पीके' को सप्लाई किया। खाते की जानकारी व्हाट्सएप और दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए शेयर की जाती थी और ठगी के पैसे पाने के लिए इस्तेमाल करने से पहले खातों की पहले जांच की जाती थी।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़ा हुआ है। दिल्ली और मुंबई में बैठे ये आरोपी दरअसल कंबोडिया में बैठे साइबर ठगों के लिए काम कर रहे थे।

वहीं से भारतीय लोगों को टारगेट किया जाता था और उन्हें निवेश के नाम पर फंसाया जाता था। इसके लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया जाता था, खासकर फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर लोगों को झांसे में लिया जाता था।

इस पूरे मामले में पुलिस की कार्रवाई से एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा हुआ है। फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह से जुड़े और कितने लोग हैं और कितने लोगों को इन्होंने अपना शिकार बनाया है।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें