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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:26 · नई दिल्ली संस्करण

दिल्ली प्राइवेट स्कूल फीस कानून: सुप्रीम कोर्ट को सरकार का स्पष्टीकरण, 2025-26 सत्र में नहीं लागू होगा

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
दिल्ली प्राइवेट स्कूल फीस कानून: सुप्रीम कोर्ट को सरकार का स्पष्टीकरण, 2025-26 सत्र में नहीं लागू होगा

नई दिल्ली। दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों की फीस नियंत्रित करने वाले नए कानून पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है। दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली स्कूल एजुकेशन (ट्रांसपेरेंसी इन फिक्सेशन एंड रेगुलेशन ऑफ फीस) एक्ट, 2025 को वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2025-26 में लागू नहीं किया जाएगा। यह कानून अब अगले शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगा।

शिक्षा निदेशालय की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने यह जानकारी दी। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कानून को शैक्षणिक सत्र के बीच में जल्दबाजी से लागू करने पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने कहा था कि ऐसा करने से स्कूलों और अभिभावकों को परेशानी हो सकती है और यह व्यावहारिक नहीं होगा। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की पीठ ने माना कि कानून का उद्देश्य अच्छा है। लेकिन, इसे सही समय पर लागू करना जरूरी है। सरकार के इस फैसले के बाद कोर्ट ने कहा कि अब इस पर दखल देने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सरकार ने समझदारी दिखाई है।

यह कानून प्राइवेट स्कूलों में फीस की मनमानी बढ़ोतरी रोकने के लिए बनाया गया है। इसके तहत हर स्कूल को फीस तय करने के लिए एक स्कूल लेवल कमेटी बनानी होगी।

इस कमेटी में स्कूल प्रबंधन का प्रतिनिधि, प्रधानाचार्य, तीन शिक्षक, पांच अभिभावक और शिक्षा निदेशालय का एक प्रतिनिधि शामिल होगा।

कमेटी फीस के प्रस्ताव पर विचार करेगी और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी। इसके अलावा जिला स्तर पर अपील कमेटी भी होगी। कानून कैपिटेशन फीस वसूलने पर रोक लगाता है और अतिरिक्त शुल्क पर भी नियंत्रण रखता है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून की वैधता से जुड़ा मामला दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है। अब आगे की सुनवाई और फैसला हाई कोर्ट ही करेगा।

प्राइवेट स्कूल एसोसिएशंस ने इस कानून को चुनौती दी है। लेकिन, कोर्ट ने फिलहाल इसे लागू करने के तरीके पर ही ध्यान दिया। अभिभावक संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि इससे फीस में अचानक बढ़ोतरी पर लगाम लगेगी। अगले साल से लागू होने पर स्कूलों को भी तैयारी का समय मिलेगा। यह कदम दिल्ली में शिक्षा की पहुंच और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

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