मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:23 · नई दिल्ली संस्करण

दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट नाराज, राज्यों से मांगी एक हफ्ते में रिपोर्ट

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट नाराज, राज्यों से मांगी एक हफ्ते में रिपोर्ट

नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए उपाय सुझाने और लागू कराने को लेकर बने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग या राज्य सरकारों ने निर्देशों का पालन कराने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। जस्टिस एएस ओका की अध्यक्षता वाली बेंच ने गुरुवार को राज्य सरकारों से एक हफ्ते में ताजा हालात पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग में विशेषज्ञ की नियुक्ति की जाए। आज सुनवाई के दौरान वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने कहा कि सितंबर के पहले 15 दिन पंजाब में पराली जलाने की 129 और हरियाणा में 81 घटनाएं हुईं। आयोग ने बताया कि प्रदूषण को लेकर राष्ट्रीय मानक की तुलना में दिल्ली-एनसीआर में अधिक कड़े उत्सर्जन मानक व मानदंड हैं। किसानों के लिए फसल प्रबंधन उपकरण खरीदने के लिए वित्त वर्ष 2024-25 में पंजाब के लिए 150 करोड़ और हरियाणा के लिए 75 करोड़ जारी किए गए। इसके अलावा आयोग ने अपनी स्थापना के बाद से समय-समय पर विभिन्न आदेशों, दिशा-निर्देशों और आधिकारिक संचारों के अलावा 83 वैधानिक निर्देश और 15 परामर्श जारी किए हैं। साथ ही अलग-अलग जगहों पर नियमों का उल्लंघन करने वाली 1,099 इकाइयों को बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा इस साल क्षेत्रीय समीक्षा बैठकें आयोजित की गईं, जिसमें पूर्ण आयोग और उप समितियों की कई बैठकें की गईं।आयोग की ओर से कहा गया कि धान की पराली जलाने से निपटने के लिए जून 2021 में मार्गदर्शक ढांचा बनाया गया था। इसके अलावा फसल विविधीकरण, बासमती और कम भूसा वाले धान, यथास्थान फसल अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी की खरीद के लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जाती है।गौरतलब है कि 27 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने से रोक पाने में नाकाम रहने पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग से कहा था कि कानून का पालन नहीं किया जा रहा है। आप एक भी ऐसा दिशानिर्देश दिखाइए, जो आपने संबंधित पक्षों को जारी किया हो। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने कहा था कि संबंधित पक्षों को एडवाइजरी और दिशानिर्देश जारी किए जा रहे हैं लेकिन कोर्ट इन प्रयासों से संतुष्ट नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा था कि ये सब हवा में है। एनसीआर में क्या हुआ, वो कहीं नहीं दिखाई दे रहा है।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें