मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:44 · नई दिल्ली संस्करण

दिल्ली मेट्रो के शानदार 23 साल: तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल ने दिखाई थी हरी झंडी, 40 प्रतिशत बिजली खुद बनाती है मेट्रो

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
दिल्ली मेट्रो के शानदार 23 साल: तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल ने दिखाई थी हरी झंडी, 40 प्रतिशत बिजली खुद बनाती है मेट्रो

नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट से सफर करने वाले लोगों की लाइफलाइन बन चुकी दिल्ली मेट्रो के बुधवार को 23 साल पूरे हो गए। 24 दिसंबर 2002 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रेड लाइन पर शाहदरा से तीस हजारी के बीच पहली मेट्रो ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।

यह मेट्रो दिल्ली के परिवहन इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई है। इस पहली ट्रेन ने अपनी रेवेन्यू सर्विस की शुरुआत की। उसी दिन से न केवल दिल्ली मेट्रो, बल्कि भारत के सबसे सफल और भरोसेमंद मास ट्रांसपोर्ट सिस्टम की यात्रा भी शुरू हुई।

दिल्ली मेट्रो नेटवर्क पर चलने वाली यह पहली ट्रेन आज भी बड़े ट्रेन बेड़े में अपनी खास पहचान रखती है।

इसे समय-समय पर वैश्विक मानकों के अनुरूप अपग्रेड किया गया है, जिससे यह आधुनिक और सुरक्षित बनी रहे। शुरुआत में इस ट्रेन में चार कोच थे, लेकिन यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए 2014 में कोचों की संख्या छह और फिर 2023 में इसे बढ़ाकर आठ कर दिया गया।

2002 से लगातार सेवा में रही इस ट्रेन ने अब तक लगभग 2.9 मिलियन किलोमीटर की दूरी तय की है। इस दौरान करीब 2.4 मिलियन बार दरवाजों का संचालन हुआ और 60 मिलियन से अधिक यात्रियों ने सुरक्षित यात्रा की। चार कोच वाली इस ट्रेन की शुरुआती लागत लगभग 24 करोड़ रुपए थी।

इस ट्रेन के एडवांस्ड प्रोपल्शन सिस्टम ने रीजेनरेटिव ब्रेकिंग के माध्यम से इस्तेमाल होने वाली कुल बिजली का लगभग 40 प्रतिशत पुनः उत्पन्न कर कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब तक डीएमआरसी की मेंटेनेंस टीम द्वारा इसके दो बड़े ओवरहॉल किए जा चुके हैं, जिनकी बदौलत यह न्यूनतम 40,000 किलोमीटर की कॉन्ट्रैक्ट शर्त के मुकाबले 85,000 किलोमीटर का एमडीबीएफ बनाए रखने में सफल रही है।

2024 में इसके मिड-लाइफ रिहैबिलिटेशन के तहत आधुनिक आईपी आधारित सीसीटीवी, एकीकृत यात्री आपातकालीन अलार्म, एलसीडी डायनामिक रूट मैप, फायर डिटेक्शन सिस्टम, डोर और रिले पैनल मरम्मत, मोबाइल-लैपटॉप चार्जिंग सॉकेट और नई रीपेंटिंग जैसे कई अहम अपग्रेड किए गए।

इसी के साथ कुछ ही समय में दिल्ली मेट्रो नेटवर्क लंबाई के मामले में दुनिया के टॉप-5 शहरों में शामिल हो जाएगी। मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों के सामान की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए सभी बैगेज एक्सरे मशीनों पर कैमरे लगाने का काम भी नए साल में पूरा हो जाएगा।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें