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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:20 · नई दिल्ली संस्करण

दिल्ली : अंतरराज्यीय साइबर क्राइम सिंडिकेट का भंडाफोड़, 'साइबर हॉक' के तहत 8 आरोपी गिरफ्तार

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
दिल्ली : अंतरराज्यीय साइबर क्राइम सिंडिकेट का भंडाफोड़, 'साइबर हॉक' के तहत 8 आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस के पूर्वी जिले ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर क्राइम सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जो दिल्ली-एनसीआर से मुरादाबाद और बरेली (उत्तर प्रदेश) तक फैला हुआ था। यह सिंडिकेट चीन में बैठे ऑपरेटरों द्वारा नियंत्रित था और साइबर फ्रॉड से जुटाए गए पैसे को म्यूल बैंक अकाउंट्स के जरिए लॉन्डर कर रहा था।

ऑपरेशन 'साइबर हॉक' के तहत 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस ने आरोपियों के पास से 4,70,000 रुपए नकद, 7 बैंक डेबिट कार्ड, 14 मोबाइल फोन और 20 सिम कार्ड बरामद किए। जांच में कुल 85 म्यूल बैंक अकाउंट्स (इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, आरबीएल बैंक, फेडरल बैंक, एक्सिस बैंक आदि) का पता चला, जिनसे पैन-इंडिया स्तर पर लगभग 15 करोड़ रुपए के संदिग्ध लेन-देन हुए। समन्वय पोर्टल के माध्यम से 600 से अधिक एनसीआरपी शिकायतें इन अकाउंट्स से जुड़ी पाई गईं। जांच जारी है और पीड़ितों की पहचान की जा रही है।

मामला 20 नवंबर 2025 को पांडव नगर थाने में एफआईआर नंबर 489/2025 धारा 318(4)/112 बीएनएस के तहत दर्ज हुआ। शुरुआत एक तमिलनाडु निवासी सोरना सुंदरी की शिकायत से हुई, जिनके यस बैंक खाते से 26 सितंबर 2025 को 6,000 रुपए धोखाधड़ी से ट्रांसफर हुए।

जांच में यह म्यूल अकाउंट मोहम्मद वसीम (शालीमार गार्डन, साहिबाबाद, गाजियाबाद) के नाम पर पाया गया। वसीम के नाम पर एक्सिस, फेडरल और आरबीएल बैंक में अन्य अकाउंट्स भी मिले, जिनसे 39 एनसीआरपी शिकायतें जुड़ी थीं।

पूछताछ में पता चला कि आरोपी एक संगठित गैंग का हिस्सा हैं। स्पेशल स्टाफ ईस्ट की टीम (इंस्पेक्टर स्पेशल स्टाफ के नेतृत्व में एसआई अमन, एचसी विनीत, विशाल, हिमांशु आदि) ने अकाउंट स्टेटमेंट, इंटरनेट बैंकिंग आईपी लॉग और ट्रांजैक्शन का गहन विश्लेषण किया।

आरोपियों ने व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर सिंडिकेट ग्रुप्स में म्यूल अकाउंट्स, लॉगिन आईडी-पासवर्ड, एपीके फाइल्स और क्रिप्टो वॉलेट आईडी का आदान-प्रदान किया।

चीन के ऑपरेटरों ने टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए म्यूल अकाउंट्स का कंट्रोल लिया। उन्होंने एसएमएस फॉरवर्डर एपीके भेजीं, जिन्हें आरोपी पीड़ित अकाउंट्स के रजिस्टर्ड मोबाइल पर इंस्टॉल करते थे। इससे ओटीपी बाईपास होता था और लाभार्थी जोड़कर पैसे तुरंत निकाले जाते थे।

फंड्स कई लेयर्स में ट्रांसफर होकर यूएसडीटी, मेटा मास्क, बीटगेट, बाइनेंस आदि प्लेटफॉर्म्स पर क्रिप्टो में बदल दिए जाते थे। आरोपियों को यूएसडीटी में कमीशन मिलता था।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद वसीम (25, शालीमार गार्डन, गाजियाबाद), तोसीन मलिक (29, गाजियाबाद), साबिर (36, सीमापुरी, दिल्ली), फुरकान उर्फ डॉ. शिनू (24, बदायूं, यूपी), साहिबे आलम (25, मुरादाबाद), मो. जावेद (30, रामपुर, यूपी), मो. राजा कादरी (35, बरेली), नूर मोहम्मद (24, ठाणे, महाराष्ट्र) के रूप में हुई है।

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