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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:21 · नई दिल्ली संस्करण

दिल्ली-एनसीआर में लोगों के लापता होने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी किया

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
दिल्ली-एनसीआर में लोगों के लापता होने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी किया

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस और एनसीआरबी (राष्‍ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्‍यूरो) को भी नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।

हाईकोर्ट में एक पीआईएल फाइल की गई, जिसमें 2026 के पहले 15 दिनों में राष्ट्रीय राजधानी में 800 से ज्यादा लोगों के गायब होने पर कार्रवाई की मांग की गई। बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई की। हाईकोर्ट ने कहा कि लापता लोगों को लेकर दो तरह के नैरेटिव मीडिया में चल रहे हैं।

हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस, भारत सरकार, दिल्ली सरकार और एनसीआरबी से मामले में जवाब मांगा है।

हाईकोर्ट ने यह भी पूछा है कि क्या इसी तरह का कोई मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी को होगी।

पिछले दिनों एक रिपोर्ट में राजधानी दिल्ली में सिर्फ 15 दिनों में 800 से ज्यादा लोग गायब होने का दावा किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें 191 नाबालिग और 616 वयस्क शामिल थे। आंकड़ों के अनुसार अब तक 235 लोगों का पता लगाया जा चुका है, जबकि 572 लोग अभी भी लापता बताए गए हैं।

विपक्षी दल आम आदमी पार्टी ने भी इस दावे का समर्थन किया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा, "देश की राजधानी दिल्ली में पिछले 15 दिनों में 800 से अधिक लोग गायब हो गए हैं, इसमें से ज्यादातर बच्चियां हैं।

आपके बच्चों की सुरक्षा करने में सरकार के चारों इंजन फेल हो गए हैं, इसलिए अपना और अपने बच्चों का ध्यान रखें। आपके बच्चों की सुरक्षा करने में सरकार के चारों इंजन फेल हो गए हैं, इसलिए अपना और अपने बच्चों का ध्यान रखें।"

6 फरवरी को दिल्ली पुलिस ने रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि आंकड़ों को गलत तरीके से पेश कर लोगों में डर फैलाया जा रहा है।

पुलिस ने चेतावनी दी थी कि जो लोग जानबूझकर भ्रामक जानकारी फैलाकर दहशत का माहौल बना रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, 9 फरवरी को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया था। एनएचआरसी ने कहा कि अगर यह रिपोर्ट सही है, तो यह गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन का मामला बनता है। इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी कर दो हफ्तों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी।

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