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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 9:34 · नई दिल्ली संस्करण

दिल्ली हाईकोर्ट ने उत्तम नगर में बुलडोजर कार्रवाई पर अंतरिम रोक बढ़ाई

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
दिल्ली हाईकोर्ट ने उत्तम नगर में बुलडोजर कार्रवाई पर अंतरिम रोक बढ़ाई

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने उत्तम नगर में 26 साल के एक युवक की हत्या के मामले में बुलडोजर कार्रवाई पर अंतरिम रोक को बढ़ा दिया है। बुधवार को हाईकोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) से कहा कि हत्या के आरोपियों के घरों को गिराने की कार्रवाई न की जाए।

जस्टिस अमित बंसल ने उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें आरोपियों के घरों को गिराए जाने से बचाने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को संशोधित याचिका दाखिल करने को कहा। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पुलिस संरक्षण की मांग और संभावित बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग को लेकर अलग-अलग याचिका दाखिल करने का निर्देश दिया।

सुनवाई के दौरान एमसीडी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पोद्दार ने कोर्ट को बताया कि गिराई गई बिल्डिंग एक सड़क के कब्जे वाले हिस्से पर बनी थी। एमसीडी ने कोर्ट में कहा, "याचिकाकर्ता के घर एक सड़क पर कब्जा करके बनाए गए थे। कानून कहता है कि तोड़फोड़ की कार्रवाई करने से पहले आरोपियों को कोई नोटिस देने की जरूरत नहीं है।"

एमसीडी ने कहा, "जो तोड़फोड़ हुई है, वह (सिर्फ) बिना इजाजत का कंस्ट्रक्शन नहीं है। उन्होंने सड़क पर कब्जा किया है। यह कोई अकेली कार्रवाई नहीं थी।

यह एक नियमित काम था। उसने (याचिकाकर्ता ने) भी सड़क पर कब्जा किया है।"

एमसीडी के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता से कहा जाना चाहिए कि वह हलफनामे में बताएं कि जिन घरों की बात हो रही है, वे सड़क पर नहीं हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर वह मकान सार्वजनिक सड़क पर हैं, तब भी नोटिस जारी होना चाहिए।

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि मुख्य आरोपी का घर तोड़ दिया गया है। मैं सह-आरोपी हूं। एफआईआर 5 मार्च को दर्ज की गई थी। बाद में, कुछ लोगों ने घर में घुसकर उसे नुकसान पहुंचाया।

हमें कई बार धमकियां मिली हैं कि हमारा घर गिरा दिया जाएगा।

एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने सुझाव दिया कि याचिका सिर्फ एमसीडी के तोड़फोड़ तक ही सीमित होनी चाहिए और मर्डर केस की पुलिस जांच से इसका कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए। इसके बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को नई याचिका दाखिल करने के लिए कहा।

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