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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:22 · नई दिल्ली संस्करण

दिल्ली हाई कोर्ट में सदानंद मास्टर के राज्यसभा नामांकन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
दिल्ली हाई कोर्ट में सदानंद मास्टर के राज्यसभा नामांकन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने सी. सदानंद मास्टर के राज्यसभा में नामांकन को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है।

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि याचिका में कोई ठोस आधार नहीं है और इसमें उठाए गए तर्क कानून की कसौटी पर टिकते नहीं हैं। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता द्वारा मांगी गई राहत किसी भी तरह से स्वीकार नहीं की जा सकती, इसलिए इस पीआईएल को समाप्त किया जाता है।

यह जनहित याचिका पेशे से वकील सुभाष थीक्कादन ने दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि राज्यसभा के लिए मनोनीत किए गए सी. सदानंद मास्टर के पास संविधान में निर्धारित मानकों के अनुसार आवश्यक विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव नहीं है।

याचिकाकर्ता का कहना था कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिलता, जिससे यह साबित हो सके कि उनके पास साहित्य, विज्ञान, कला या समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्तर की विशेष विशेषज्ञता या उल्लेखनीय योगदान है।

यह भी तर्क दिया गया था कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80(3) के तहत राज्यसभा में मनोनीत होने वाले व्यक्ति को इन क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देना चाहिए, लेकिन याचिकाकर्ता के अनुसार सी. सदानंद मास्टर के मामले में इस तरह का कोई स्पष्ट आधार सामने नहीं आता।

दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस याचिका पर शुरुआती स्तर पर ही सवाल उठाए थे। अदालत ने पूछा था कि क्या ऐसे मामलों में यह तय करने के लिए कोई न्यायिक रूप से स्वीकार्य और स्पष्ट मानक मौजूद है, जिसके आधार पर किसी नामांकन को चुनौती दी जा सके? सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी संकेत दिया कि इस तरह के विषयों में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाएं होती हैं।

सदानंद मास्टर को पिछले वर्ष 12 जुलाई को भारत के राष्ट्रपति ने राज्यसभा के लिए मनोनीत किया था। उनके नामांकन को लेकर सार्वजनिक बहस भी हुई थी, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल असहमति या सवाल उठाना किसी नियुक्ति को अवैध साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हो सकता।

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