*दिल्ली एमसीडी सदन में भारी हंगामा: आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर लगाए मजदूर और दलित विरोधी होने के गंभीर आरोप*
नई दिल्ली– दिल्ली नगर निगम सदन की कार्यवाही एक बार फिर भारी हंगामे की भेंट चढ़ गई। सदन में आज आम आदमी पार्टीके पार्षदों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और भारतीय जनता पार्टी पर मजदूर और दलित विरोधी होने के गंभीर आरोप लगाए। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा और अब यह अगली बैठक तक टाल दी गई है।
जैसे ही सदन की कार्यवाही आरंभ हुई, वैसे ही आप के पार्षदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। उनके हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर “भाजपा मजदूर विरोधी है” और “दलितों का अपमान बंद करो” जैसे नारे लिखे थे। पार्षदों ने सभागार के बीचोंबीच आकर विरोध जताया और चेयर की ओर कूच करने की कोशिश की, जिसे सुरक्षाकर्मियों ने रोका। सदन में अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जिससे बहस और विचार-विमर्श संभव नहीं हो पाया।
आप पार्षदों की मुख्य मांग है कि दिल्ली में "चार इंजन की सरकार" – यानी केंद्र, राज्य, एलजी और एमसीडी – मिलकर नगर निगम के 12,000 संविदा कर्मचारियों को स्थायी करने की घोषणा करे। उनका कहना है कि ये कर्मचारी वर्षों से मेहनत कर रहे हैं, लेकिन भाजपा-प्रशासित एमसीडी प्रशासन ने अब तक उन्हें नियमित करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ पार्षदों ने सदन में कहा कि भाजपा केवल चुनावी वादे करती है, लेकिन मजदूरों और दलितों के हित में कोई वास्तविक कार्य नहीं करती। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की नीतियां पूरी तरह से पूंजीपतियों के पक्ष में हैं और हाशिए पर खड़े तबकों की उपेक्षा करती हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि जब-जब एमसीडी में कर्मचारियों की बहाली या नियमितीकरण की बात आती है, भाजपा टालमटोल की नीति अपनाती है।
आप पार्षदों का यह भी आरोप है कि भाजपा नेतृत्व लगातार दलित कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी कर रहा है। “हमारा सवाल साफ है – जिन लोगों ने महामारी के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर सफाई और स्वास्थ्य सेवाओं को बनाए रखा, क्या उन्हें स्थायी नौकरी का अधिकार नहीं है?” – ऐसा कहना था आप के मुख्य प्रवक्ता पार्षद राहुल शर्मा का। उन्होंने केंद्र सरकार पर भी हमला करते हुए कहा कि मोदी सरकार और उपराज्यपाल कार्यालय दोनों ही जानबूझकर इस मुद्दे पर चुप हैं।
इस विरोध के जवाब में भाजपा पार्षदों ने आप के प्रदर्शन को "राजनीतिक स्टंट" करार दिया और कहा कि आप सरकार स्वयं दिल्ली में कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं दे पा रही thi, और अब एमसीडी को बदनाम करने की साजिश कर रही है। भाजपा के अनुसार, कर्मचारियों की नियमितीकरण प्रक्रिया एक जटिल प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसे जल्दबाजी में नहीं किया जा सकता।
हालांकि, यह टकराव कोई नया नहीं है। बीते कुछ महीनों से एमसीडी सदन में अक्सर हंगामा देखने को मिला है। चाहे वह स्थायी नियुक्तियों का मामला हो, सफाई कर्मचारियों के वेतन की देरी हो या निगम बजट का बंटवारा – आप और भाजपा के बीच तीखी बहस आम बात हो गई है।
आज की कार्यवाही के अंत में स्पीकर ने सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की और हंगामे को देखते हुए बैठक को स्थगित कर दिया। अब अगली बैठक में ही यह स्पष्ट होगा कि क्या एमसीडी के 12 हजार संविदा कर्मचारियों के भविष्य को लेकर कोई निर्णायक कदम उठाया जाएगा या यह मुद्दा केवल राजनीतिक बहस का हिस्सा बनकर रह जाएगा।
वर्तमान में दिल्ली की राजनीति अब केवल सड़कों और चुनावों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सदन के भीतर भी सत्ता और विपक्ष की लड़ाई तीव्र होती जा रही है। ऐसे में आम जनता यह सवाल जरूर पूछ रही है कि क्या उनके प्रतिनिधि जनहित के मुद्दों पर गंभीर हैं, या केवल सियासी शक्ति प्रदर्शन में व्यस्त हैं?





