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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:38 · नई दिल्ली संस्करण

जापान के स्टील्थ वॉरशिप पर पहुंचे रक्षा सचिव

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
जापान के स्टील्थ वॉरशिप पर पहुंचे रक्षा सचिव

नई दिल्ली। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सामरिक परिदृश्य के बीच भारत और जापान ने अपने रक्षा एवं समुद्री सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने का स्पष्ट संदेश दिया है। मंगलवार को भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने हिरोशिमा में जापान की समुद्री आत्मरक्षा सेना के नौसैनिक अड्डे का दौरा किया। यहां जापान में उन्होंने सातवें ‘मोगामी’ श्रेणी के अत्याधुनिक स्टील्थ युद्धपोत ‘नियोदो’ का निरीक्षण किया और कुरे जिले के कमांडेंट वाइस एडमिरल मात्सुमोतो तमोत्सु से मुलाकात की।

गौरतलब है कि भारतीय रक्षा सचिव के हिरोशिमा पहुंचने से एक दिन पहले ही टोक्यो में भारत और जापान के बीच रक्षा नीति संवाद का आठवां दौर आयोजित किया गया था। दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए अपनी साझेदारी को और आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

13 जुलाई को हुई उच्चस्तरीय वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने ही किया था। वहीं जापानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय मामलों के लिए रक्षा उपमंत्री कानो कोजी ने किया था।

बैठक में दोनों देशों के बीच पिछली वार्ता के बाद रक्षा सहयोग के क्षेत्र में हुई प्रगति की समीक्षा की गई।

साथ ही दोनों देशों ने विशेष सामरिक एवं वैश्विक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई गई। जापान यात्रा की शुरुआत रक्षा सचिव ने टोक्यो स्थित आत्मरक्षा बल स्मारक शिला पर पुष्पचक्र अर्पित कर की थी।

उन्होंने उन जापानी सैनिकों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने अपने देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया।

यह कदम दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और पारस्परिक सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है। इसके बाद हिरोशिमा स्थित कुरे नौसैनिक अड्डे पर पहुंचे हैं। यहां पर रक्षा सचिव ने जापानी नौसेना की क्षमताओं का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। मोगामी श्रेणी का स्टील्थ युद्धपोत जापान की आधुनिक नौसैनिक शक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

इस युद्धपोत का दौरा भारत और जापान के बीच बढ़ते नौसैनिक सहयोग तथा समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में गहराते संबंधों को दर्शाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा, नियम-आधारित व्यवस्था और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने में भारत और जापान की साझेदारी लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।

रक्षा सचिव की यह यात्रा इसी बढ़ते सामरिक सहयोग की एक और महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है। रक्षा मंत्रालय का मानना है कि यह दौरा न केवल दोनों देशों के रक्षा संबंधों की मजबूती को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि भारत और जापान आने वाले वर्षों में समुद्री सुरक्षा, सैन्य सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए और अधिक समन्वित भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।

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