मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:21 · नई दिल्ली संस्करण

ईरान के साथ तनाव कम होने की उम्मीद के चलते कच्चा तेल 6 प्रतिशत लुढ़का

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
ईरान के साथ तनाव कम होने की उम्मीद के चलते कच्चा तेल 6 प्रतिशत लुढ़का

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में ईरान के साथ तनाव कम होने की उम्मीद के चलते मंगलवार को कच्चे तेल की कीमत में गिरावट देखने को मिली है और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे फिसल गया है।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स की कीमत 6.51 डॉलर या 6.6 प्रतिशत गिरकर 92.45 डॉलर प्रति बैरल हो गई। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड की कीमत 6.12 डॉलर या 6.5 प्रतिशत गिरकर 88.65 डॉलर हो गई।

तेल की कीमतों में गिरावट राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद आई, जिसमें कहा गया कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियान "बहुत जल्द" समाप्त हो जाएगा।

ट्रंप ने जीत को उस बिंदु के रूप में परिभाषित किया है जब तेहरान के पास ऐसे हथियार विकसित करने की क्षमता नहीं रह जाएगी जो अमेरिका, इजरायल या उसके सहयोगियों के लिए खतरा बन सकें।

ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बाधित करने के प्रयासों के खिलाफ चेतावनी दी, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। उन्होंने कहा, "होर्मुज जलडमरूमध्य सुरक्षित रहेगा, क्योंकि हमारे नौसेना के कई जहाज वहां तैनात हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक संकरा मार्ग है और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल ट्रंजिट मार्गों में से एक है। खाड़ी उत्पादकों के कच्चे तेल के निर्यात का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है, जिससे इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का खतरा वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन जाता है।

अमेरिका ने इस महीने की शुरुआत में ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को कमजोर करने के उद्देश्य से इजरायल के साथ संयुक्त सैन्य अभियान के तहत ईरानी ठिकानों पर बड़े हमले किए।

इससे पहले, सोमवार के सत्र में तेल की कीमतें कई सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थीं, जिसमें ब्रेंट क्रूड की कीमत 119.50 डॉलर और डब्ल्यूटीआई की कीमत 119.48 डॉलर हो गई, जो 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को संसद में कहा कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का भारत में मुद्रास्फीति की दर पर फिलहाल कोई खास असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि देश की मुद्रास्फीति "निम्नतम सीमा" के करीब है।

वित्त मंत्री ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि पश्चिम एशिया में 28 फरवरी, 2026 को भू-राजनीतिक संघर्ष शुरू होने तक, भारत द्वारा आयात किए जाने वाले कच्चे तेल की कीमत पिछले एक वर्ष से लगातार गिर रही थी।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें