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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:11 · नई दिल्ली संस्करण

रवीन्द्र सरोवर के पास क्रिकेट अभ्यास नहीं कर सकेंगे सितारे, हाई कोर्ट ने लगाई रोक

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन

कोलकाता,। रवीन्द्र सरोवर झील क्षेत्र में क्रिकेट लीग के अभ्यास

पर रोक लगा दी गई है। पर्यावरण से संबंधित एक मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट

ने यह अंतरिम आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने कहा है कि अब उस क्षेत्र में किसी

भी प्रकार के क्रिकेट खेल का आयोजन नहीं किया जाएगा और न ही खिलाड़ी वहां

अभ्यास कर सकेंगे। हाई कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से हलफनामा मांगा

है। मामले की अगली सुनवाई 25 जुलाई को होगी।

नगर निगम का निर्णय

हाल

ही में कोलकाता नगर निगम ने रवीन्द्र सरोवर की 98 कट्ठा जमीन का उपयोग

क्रिकेट लीग के अभ्यास के लिए करने की अनुमति दी थी। यह अनुमति कैलकटा

एंटरटेनमेंट क्लब फाउंडेशन को दी गई थी। इस संबंध में एक नोटिस भी जारी

किया गया था। लेकिन नगर निगम के इस निर्णय के कारण पर्यावरण को नुकसान

पहुंचने का आरोप लगाया गया। ''सबरमंच'' नामक एक संगठन ने इसके खिलाफ

कलकत्ता हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की।

अदालत की टिप्पणी

मामले

की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश टी.एस. शिवगणनम और न्यायाधीश हिरण्मय

भट्टाचार्य की खंडपीठ में हुई। अदालत ने क्रिकेट खेल पर रोक लगाने का

अंतरिम आदेश दिया। रवीन्द्र सरोवर झील से सटे जमीन का उपयोग सितारे अपने

क्रिकेट अभ्यास के लिए करते हैं। ये सितारे पेशेवर क्रिकेटर नहीं हैं बल्कि

मनोरंजन जगत के सितारे हैं जो फ्रेंडशिप लीग का आयोजन करते हैं।

क्या है मामला

याचिका

दायर करने वाले संगठन का कहना है कि उस क्षेत्र में सितारों की क्रिकेट

लीग के अभ्यास के कारण पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है और पेड़ों की

अंधाधुंध कटाई हो रही है।

मामले की सुनवाई के

दौरान मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि राज्य बहुत कुछ कर सकता है। मैदान

में सेना की जमीन पर भी ऐसी कई चीजों का आयोजन होता है, जिससे क्षेत्र को

नुकसान पहुंचता है। ये सभी सार्वजनिक संपत्तियां कभी भी निजी उपयोग के लिए

इस्तेमाल नहीं की जा सकतीं। हो सकता है कि ये सितारे राज्य के प्रिय हों,

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें सरकारी जमीन का उपयोग मनमाने तरीके

से करने की अनुमति मिलनी चाहिए।

इस मामले में अदालत ने

राज्य सरकार का पक्ष जानना चाहा है। अगली सुनवाई के दिन राज्य को हलफनामा

देकर अपनी बात रखनी होगी। इसके बाद अदालत अगला निर्णय करेगी।

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