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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:36 · नई दिल्ली संस्करण

बिहार में सरकारी शिक्षकों के कोचिंग एवं निजी ट्यूशन पढ़ाने पर सख्ती, कार्रवाई के निर्देश

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
बिहार में सरकारी शिक्षकों के कोचिंग एवं निजी ट्यूशन पढ़ाने पर सख्ती, कार्रवाई के निर्देश

पटना : बिहार सरकार ने सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों द्वारा कोचिंग, निजी ट्यूशन और व्यावसायिक संस्थानों में पढ़ाने की गतिविधियों पर सख्त रुख अपनाया है।

माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने गुरुवार को राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ) को पत्र जारी कर ऐसे शिक्षकों के विरुद्ध कठोर अनुशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

निर्देश में कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य के प्रारंभिक से लेकर उच्च माध्यमिक विद्यालयों तक बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। वर्तमान में अधिकांश विद्यालयों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक उपलब्ध हैं।

ऐसे में यह आवश्यक है कि शिक्षक अपने विद्यालयों के विद्यार्थियों की पढ़ाई के प्रति पूरी तरह जवाबदेह रहें और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करें।

निदेशक ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि सरकार द्वारा शिक्षकों की शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने के लिए समय-समय पर विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।

बच्चों के सर्वांगीण विकास और बेहतर शैक्षणिक वातावरण के लिए जरूरी है कि शिक्षक अपनी पूरी ऊर्जा और समय विद्यालयी शिक्षा पर केंद्रित करें।

पत्र में कहा गया है कि कई मामलों में शिक्षकों के विद्यालय परिसर के भीतर अथवा अन्य स्थानों पर संचालित कोचिंग, निजी ट्यूशन और व्यावसायिक संस्थानों से जुड़े होने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

इससे उनके पदस्थापित विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है और शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने जिलों में यह सुनिश्चित करें कि कोई भी सरकारी विद्यालय का शिक्षक विद्यालय परिसर या अन्य किसी स्थान पर संचालित कोचिंग, निजी ट्यूशन अथवा व्यावसायिक संस्थानों में शिक्षण कार्य न करे।

निदेशक ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई शिक्षक ऐसे कार्यों में संलिप्त पाया जाता है तो इसे शिक्षकों के लिए निर्धारित आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित शिक्षक के खिलाफ नियमानुसार कठोर एवं अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा विभाग के इस निर्देश को सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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